क्षेत्र की जर्जर सड़कों व अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए शासन-प्रशासन द्वारा की जा रही वादाखिलाफी के विरुद्घ भूख हड़ताल पर बैठे लोकतंत्र रक्षक सेनानी की हालत रविवार को बिगड़ गई है। लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी इरशाद अहमद तहसील परिसर मेें चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
इरशाद की हालत बिगड़ने पर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अनशन स्थल पर इरशाद का चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी है। इरशाद प्रशासन की बात मानने को तैयार नहीं है। स्थानीय वकील भी उनके समर्थन में उतर आए हैं।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी चौधरी इरशाद अहमद ने जून में भी जर्जर सड़कों की मरम्मत व अन्य जन समस्याओं को लेकर अनशन किया था। उस समय एसडीएम द्वारा शीघ्र मांगों पर अमल शुरू कराने के आश्वासन पर इरशाद ने यह कहते हुए अनशन समाप्त किया था कि यदि एक माह में काम शुरू नहीं हुआ तो वह फिर भूख हड़ताल करेंगे। कोई सुनवाई न होने पर इरशाद ने नौ जुलाई से गांधी पार्क उतरौला में भूख हड़ताल करने का नोटिस प्रशासन को दिया।
प्रशासन ने गांधी पार्क में भूख हड़ताल की अनुमति नहीं दी तो इरशाद तहसील परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भूख हड़ताल के चौथे दिन रविवार को इरशाद की तबियत बिगड़ गई। एसडीएम ने इरशाद को मनाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। अनशन स्थल पर इरशाद का स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंचे डॉ. चंद्र प्रकाश ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी है। इरशाद का कहना है कि जब तक शासन-प्रशासन उनकी मांगों पर अमल नहीं करेगा, तब तक वह भूख हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।