शनिवार को आंगनबाड़ी सेंटर बंद मिलने पर दी गई कार्रवाई की चेतावनी से भड़की दो हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने शाम के चार बजते ही कलेक्ट्रेट में धावा बोल दिया और वहां पहुंचकर डीएम कार्यालय को घेरकर नारेबाजी शुरू कर दी।
महिलाओं का गुस्सा बेकाबू होता, इससे पहले ही जिलाधिकारी को उनके आने की भनक लग गई और वह शुक्रवार को डी-वर्मिंग टेबलेट के मुद्दे पर दिए गए अपने बयान से बैकफुट पर आ गए। जिसके बाद उन्होंने जैसे-तैसे आंदोलित महिलाओं को उनकी सभी मांगे जल्द से जल्द पूरी कराने का आश्वासन देकर उन्हें वापस भेजा। वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी सेंटर पर जिन पौने चार लाख बच्चों को शनिवार के दिन डी-वर्मिंग की टेबलेट खिलाई जानी थी, वह सेंटरों के बंद होने से उन्हें नहीं खिलाई जा सकी।
बता दें कि पूरे प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां बीते कुछ दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। जिससे आंगनबाड़ी सेंटरों से संचालित होने वाली व्यवस्था जहां के तहां ठप पड़ी हैं। शुक्रवार को जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने डी-वर्मिंग की दवा खिलाए जाने को लेकर सेंटर बंद मिलने पर वहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों पर कार्रवाई की बात कही थी।
इसका पता जैसे ही आंगनबाड़ी सेंटरों पर तैनात कार्यकर्त्रियों को चला, उनका गुस्सा उबाल खा गया। शनिवार को शाम के चार बजते ही महिलाओं की भीड़ ने जिलाधिकारी कार्यालय को अपने कब्जे में ले लिया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं।
उधर जिला पंचायत में निगरानी समिति की बैठक में जैसे ही इसका पता जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन को चला तो वह शुक्रवार को दिए अपने बयान से बैकफुट पर आ गए और निगरानी समिति की बैठक बीच में ही छोड़कर उस जगह पर जा पहुंचे।
जहां महिलाओं का हुजूम इकट्ठा था। यहां जिलाधिकारी ने आक्रोशित आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को समझाने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनकी जो भी मांगें उनके स्तर से लंबित है, उसे वह एक समयातंराल में पूरा कर देंगे।
जबकि शासन स्तर से जो मांगे पूरी होनी हैं, उसके लिए वह अपनी संस्तुति के साथ इसका पत्र शासन को भेज देंगे। डीएम की इस पहल का आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने स्वागत किया और देखते ही देखते पूरा डीएम कार्यालय महिलाओं की भीड़ से खाली हो गया।