गोंडा। सुरक्षित मातृत्व दिवस अभियान के तहत शुक्रवार को महिला अस्पताल व सभी 16 सीएचसी पर गर्भवतियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) कराई गई। जिसमें 75 फीसदी गर्भवती में खून की कमी मिली। इन सभी को अपने स्वास्थ्य की विशेष निगरानी व सतर्कता बरतने का सुझाव दिया गया।
सरकार की ओर से भले ही गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन गर्भावस्था में खून की कमी दूर नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को सुरक्षित मातृत्व दिवस अभियान के तहत जिला महिला अस्पताल में 24 महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच की गई। इनमें से 18 गर्भवतियों में खून की कमी पाई गई। जिन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में रखकर बेहतर देखभाल करने का निर्देश दिया गया।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या चौबे ने बताया कि महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर न्यूनतम 11 यूनिट होना चाहिए। जबकि एएनसी के दौरान 18 महिलाओं में खून इससे कम रहा। 13 महिलाओं में एचबी 10 से भी कम रहा। डॉक्टर ने बताया कि शिविर में गर्भवतियों की प्रसव पूर्व की विभिन्न जांचें की गईं। जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया गया।
सीएमएस डॉ. देवेंद्र सिंह बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने, गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, प्रसव पूर्व जांच एवं उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने के लिए यह दिवस प्रत्येक माह की एक नौ, 16 व 24 तारीख को मनाया जाता है।
गर्भावस्था में ऐसे दूर करें खून की कमी
डॉ. सौम्या के अनुसार उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश व बादाम का सेवन करें। प्रोटीन के लिए डाइट में दाल का सेवन बढ़ाए। चुकंदर और गाजर के सेवन से खून की कमी दूर हो सकती है।