आवास विकास में पूजन करती महिलाएं। स्रोत: परिजन
गोंडा। भगवान सूर्य की उपासना का चार दिवसीय छठ पर्व शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। रविवार को खरना होगा। छठ पूजा को लेकर भक्ति के साथ ही उत्सव-उल्लास का वातावरण है। बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। वहीं, पूजन के लिए महिलाओं ने शनिवार को खैरा भवानी मंदिर पर वेदी तैयार करना शुरू कर दिया है।
आवास विकास कॉलोनी की रहने वाली रेखा सिंह ने बताया कि छठ पूजा में व्रती ''''नहाय-खाय'''' के दिन नाखून काटने के बाद स्वच्छता से बाल धुलकर स्नान करती हैं। इसके बाद अपने लिए अलग चौके में कद्दू-चावल का भोजन बनाती हैं। खरना के दिन व्रती आंशिक उपवास रखेंगी, यानी दिन में व्रत रहने के उपरांत शाम को स्वच्छता से धुले स्थान पर चूल्हा बनाकर अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से उसकी पूजा की जाएगी। तत्पश्चात प्रसाद के लिए रखे आटे से रसियाव-रोटी बनाएंगी। चौके में ही खरना किया जाएगा। रोटियां बनाने के बाद बचे हुए आटे से एक छोटी रोटी बनाकर रखी जाएगी, जिसे ओठगन कहते हैं। प्रात:काल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस रोटी को खाकर व्रत की पूर्णाहुति की जाएगी। अंजनी पांडेय का कहना है कि छठ पर्व पर भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। छठ मइया का पूजन किया जाता है।
छठ को लेकर बाजार तैयार
रेलवे ओवरब्रिज के नीचे छठ को लेकर कई दुकानें सजाई गई हैं। सूप, दउरा, मिट्टी के बर्तन के साथ फलों की खरीदारी के लिए लोगों का आना शुरू हो गया है। कुछ दुकानदार आसपास के गांव से ताजी हरी हल्दी, अदरक व सिंघाड़ा लेकर आए हैं। पत्ते लगी गाजर व मूली की भी बिक्री हो रही है। राजू ने बताया कि केले की आवक बाराबंकी से हो रही है। फल विक्रेता पंकज ने बताया कि ग्राहकों की सुविधा के लिए हमने इस बार हर तरह के फल मंगवाए हैं। फलों के अलग-अलग मूल्य हैं। इसके साथ ही बांस की कमाची से तैयार सूप की खरीदारी भी लोग कर रहे हैं।