अब सभी तरह की सेवाएं देने वाली फर्मों को भी उद्योग माना जाएगा। ऐसे उद्योगों को अब ऑनलाइन पंजीयन कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीयन न कराने वाले उद्योगों को जहां शासन की ओर से अनुमन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। वहीं अपंजीकृत उद्योगों पर निगरानी करने वाले विभाग उन्हें दंडित भी करेंगे।
शासन ने आय बढ़ाने व उद्योगों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर उन पर विभागों की निगरानी बढ़ाने के लिए उनके पंजीयन को अनिवार्य कर दिया है।
उद्योग विभाग की वेबसाइट पर निशुल्क ऑनलाइन पंजीयन शुरू हो चुका है। इसके साथ ही सूक्ष्म व लघु उद्योग के नाम मेें संशोधन कर उसे माइक्रो स्माल मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) कर दिया है।
इस बदलाव के बाद अब सभी तरह की सेवाएं देने वाली फर्म भी वस्तुओं का प्रोडक्शन करने वाले उद्योग की फेहरिस्त में शामिल मानी जाएगी।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब सभी तरह के कारोबारियों को उद्योग विभाग के पोर्टल ई-उद्योग पर ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा।
अभी तक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली फर्मों को ही उद्योग का दर्जा दिया गया था। लेकिन शासन ने अब सेवाएं प्रदान करने वाली फर्मों को भी उद्योग की फेहरिस्त में शामिल कर लिया है।
शासन ने उद्योग विभाग के अधिनियम में 2006 में संशोधन कर उसका नाम माइक्रो स्माल मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) कर दिया है।
इंटरप्राइजेज में सेवाएं देने वाले उद्योगों को शामिल किया है। उद्योग की श्रेणी में आने वाली इन फर्मों पर अब अलग-अलग विभागों के अधिकारी कार्रवाई कर सकेंगे।
अब ये फर्में भी उद्योग की फेहरिस्त में
* नर्सिंग होम, * मैरिज हाल, * सिनेमा हाल, * लांड्री हाउस, * इलेक्ट्रॉनिक हाउस, * इलेक्ट्रिकल्स हाउस, * टेंट हाउस, * आटो सर्विस, ट्रैवेल्स सर्विस, * होटल्स, * गेस्ट हाउस आदि ।
25 लाख रुपये तक का स्थायी निवेश करने वाले उद्योग को सूक्ष्म उद्योग की श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह से 50 लाख रुपये तक स्थायी पूंजी निवेश करने वाले उद्योग को मध्यम उद्योग व पांच करोड़ से अधिक की पूंजी निवेश करने वाले उद्योग को वृहद उद्योग माना गया है।
सभी तरह के संचालित उद्योगों को पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीयन ऑनलाइन किया जाना है। अब सेवाएं देने वाली फर्मों को भी उद्योग में शामिल किया गया है। ऐसे में इन फर्मों को भी पंजीयन कराना होगा। पंजीयन निशुल्क हो रहा है।
कोई भी उद्यमी अपने घर पर बैठकर ऑनलाइन पंजीयन के लिए आवेदन कर सकता है। पंजीयन न कराने वाले वाले उद्यमियों को शासन की ओर से किसी भी तरह का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा उद्योगों के अलग-अलग पहलुओं पर निगरानी रखने वाले विभागों की ओर से दंडित भी किए जाएंगे।