करनैलगंज। विभिन्न बैराजों से सरयू नदी में छोड़े गए पानी का असर बृहस्पतिवार सुबह से दिखने की संभावना है। फिलहाल एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है, लेकिन डिस्चार्ज बढ़ने के कारण जलस्तर में दोबारा वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग और प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों तथा बांधों की निगरानी बढ़ा दी है।
बुधवार शाम चार बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 105.980 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से नौ सेंटीमीटर नीचे है। सुबह आठ बजे यह 106.000 मीटर था। दिनभर में जलस्तर में दो सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। बुधवार सुबह विभिन्न बैराजों से कुल 3,09,618 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि शाम चार बजे यह घटकर 2,98,777 क्यूसेक रह गया। इसमें गिरिजा बैराज से 1,55,103 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,38,707 क्यूसेक और सरयू बैराज से 4,967 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि डिस्चार्ज में कमी आई है, लेकिन सुबह छोड़े गए अधिक पानी का असर अब नदी में दिखाई देने की संभावना है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य ने बताया कि बैराजों से छोड़े गए पानी का प्रभाव बृहस्पतिवार सुबह से जलस्तर पर पड़ सकता है।
जलस्तर में ठहराव, कटान से ग्रामीण परेशान
विश्नोहरपुर। सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच कटान प्रभावित गांवों में लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। दत्तनगर, साकीपुर के बाड़ी माझा, चहलावा, माझाराठ और दुर्गागंज में बुधवार को भी कटान जारी रही। दत्तनगर में नदी आबादी की ओर बढ़ रही है, जबकि दुर्गागंज में तेज धारा गन्ने और धान की फसल को नुकसान पहुंचा रही है। माझाराठ में जगपाल, हरिराम, राजू निषाद, मिट्ठीलाल, राजकुमार और जमुना के करीब 60 बीघा गन्ने और धान की फसल नदी में समा चुकी है। किसान श्रीराम कटान की जद में आए गन्ने को काटकर मवेशियों को खिलाने को मजबूर हैं। ग्रामीण उदयराज ने बताया कि गेहूं की फसल के समय भी खेत कटे थे, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है।