एल्गिन चरसड़ी बांध खतरे से खाली नहीं है। शनिवार को एक बार फिर से नदी का जलस्तर बढ़ने से बचाव कार्य में लगे लोगों के हाथ-पांव फूल गए। वहीं बांध को कटने से बचाने के प्रयास लगातार जारी हैं। एक तरफ बल्ली व परखो पाइन गाड़कर झाड़ एवं बालू भरी बोरियों से पायलिंग की जा रही है, तो दूसरी तरफ पोकलैंड मशीन से बांध के किनारे मिट्टी डालकर करीब दो मीटर की सपोर्टिग बनाई जा रही है।
वहीं बांध कटने के भय से ग्रामीणों का पलायन जारी है। जबकि दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अधिकारी बांध को बचाने के हरसंभव प्रयास में लगे हैं। शनिवार को घाघरा का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा। शुक्रवार को नदी का जो जलस्तर 104.866 था, वहीं शनिवार को बढ़कर 105.076 हो गया।
इससे बांध की मरम्मत व बचाव कार्य में लगे लोगों के हाथ-पांव फूलने लगे। नदी में बल्ली गाड़ कर बोल्डर, बालू भरी बोरियां व झंखाड़ डालने का काम चलता रहा। बांध पर मिट्टी डाल कर उसे और मजबूत किया जा रहा हैं। वहीं बांध के आसपास के ग्रामीण बांध की मजबूती को लेकर दहशतजदा हैं।
पिछली बाढ़ को याद करते ही वह सिहर उठते हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों का गांव से पलायन शुरू है। एसडीएम करनैलगंज वीके सिंह व उनके साथ कई अन्य अधिकारी लगातार बांध की निगरानी में जुटे हैं। एसडीएम का कहना है कि नदी की कटान अभी रुकी है।
वहीं बांध पर मौजूद सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता आनंद मोहन व मुख्य अभियंता पीके श्रीवास्तव ने बताया कि किलोमीटर 10 से 12 के बीच दो किलोमीटर की एरिया में बांध को खतरा है। इसे चार भागों में बाटकर विशेषज्ञों की चार टीमों को लगाया गया है। उन्होंने बताया कि हर तकनीक लगाकर बांध को बचाने का प्रयास किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगश प्रताप सिंह ने शनिवार को बताया कि सूबे के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के निर्देश पर विभाग के प्रमुख सचिव ने प्रमुख अभियंता आनंद मोहन व मुख्य अभियंता पीके श्रीवास्तव को बांध के बचाव के लिए बाढ़ कटान रोधी व बाढ़ सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम के साथ मौके पर भेजा है, जो अपनी टीम के साथ बांध की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
दोनों अधिकारियों के निरीक्षण में शनिवार को बांध का निरीक्षण किया गया। इसमें दो किलोमीटर बांध की स्थिति नाजुक पाई गई है। जिसकी निगरानी के लिए चार टीमों को लगाया गया है। राज्यमंत्री ने बताया कि बंधे पर जो परिवार आश्रय लिए हैं, उनके लिए पीने की पानी के लिए हैंडपंप लगवानेके निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्थाई शौचालय भी बनवाया जा रहा है।