गोंडा। बारिश के बाद एक बार फिर जिले में यूरिया की मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। फसलों को हरा रखने के लिए किसान सिंचाई के चार से पांच दिन बाद यूरिया का छिड़काव करते हैं। वहीं, तिलहनी फसलों की बोआई के पहले डीएपी की फुटकर बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
जिले में यूरिया की किल्लत कम होने के बाद सोमवार व मंगलवार को झमाझम बारिश हुई है। इटियाथोक विकासखंड के उन्नतशील किसान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के बाद धान व गन्ना की फसल में पीलापन आने लगता है। इसके लिए बारिश का पानी सूखने के बाद गन्ने में यूरिया का छिड़काव किया जाता है। इससे फसलें हरी बनी रहती हैं। बारिश होने के पांच दिन बाद से यूरिया की मांग फिर बढ़ जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने यूरिया की किल्लत रोकने के लिए एप पर प्रतिदिन खरीद-बिक्री की निगरानी के साथ ही नियमित निरीक्षण की रणनीति तैयार की गई है। सभी थोक विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि सितंबर से किसान तिलहनी फसल के साथ सब्जी की बोआई प्रारंभ कर देते हैं। जिसके लिए किसानों को डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट पाउडर व दानेदार उर्वरक का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिससे डीएपी के किल्लत न हो तथा किसानों को कम लागत में अच्छा उत्पादन मिल सके। फुटकर दुकानदारों को डीएपी न बेचने का सख्त निर्देश दिया गया है।