फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिलती एंबुलेंस

Sat, 28 Nov 2015 11:16 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
बात चाहे दुर्घटना में घायल किसी व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने की हो या फिर प्रसूता महिलाओं को चिकित्सालय ले जाने की। दोनों ही मामलों में 108 व 102 एंबुलेंस सेवा की पहल कारगर साबित होती नहीं दिखाई दे रही है। घंटों के इंतजार करने के बाद भी लोगोें को एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल पाता है। हालत यह है कि अभी भी 30 से 35 फीसदी केस फोनकाल्स के बावजूद इस सेवा की ओर से हैंडल नहीं किए जा रहे हैं।
विज्ञापन


इसके कारण दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के अलावा प्रसूता महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। तरबगंज इलाके में कुछ दिनों पहले ऐसे ही दो केस प्रकाश में आने के बाद सेवा प्रदाता फर्म से इसका जवाब भी मांगा गया था। इसके बावजूद सेवा प्रदाता फर्म की व्यवस्थाओं में अब तक कोई सुधार नहीं हो पाया है।

हालांकि सेवा प्रदाता फर्म जीवीके ईएमआरआई के जिला प्रभारी उमाशंकर वर्मा का कहना है कि जो दिक्कतें एंबुलेंस इंगेज होने के कारण अभी तक जिले में हुआ करती थीं, वह आगे से नहीं होंगी। क्योंकि उन्हें इसके लिए 9 और एंबुलेंस शनिवार को मिल गई हैं, जिससे आपातकालीन फोनकाल्स आने पर उन्हें हैंडल किया जाएगा।
विज्ञापन


चार बार में मिलीं 63 एंबुलेंस
नवंबर 2012 में प्रदेश सरकार ने 108 सेवा की 18 एंबुलेंस जिले को दी थीं। इसके बाद समाजवादी एंबुलेंस सेवा के तौर पर दो अलग-अलग राउंड में 18-18 एंबुलेंस 102 सेवा के तौर पर जिले को मुहैया कराई गईं।

वहीं, शनिवार को प्रदेश सरकार ने एक बार फिर से 108 एंबुलेंस सेवा की 9 और नई एंबुलेंस जिले को दी हैं, जिससे अब इनकी संख्या जिले में बढ़कर 63 हो गई है।

उधर, जिले के सभी 16 विकासखंडों में जहां 108 सेवा की एक-एक एंबुलेंस है तो वहीं एक एंबुलेंस महिला अस्पताल और एक एंबुलेंस जिला अस्पताल में है। 102 सेवा की दो-दो एंबुलेंस सभी 16 विकासखंडों पर मुहैया हैं। साथ ही दो-दो एंबुलेंस जिला व महिला अस्पताल में संचालित हैं।

समय फिक्स, फिर भी नहीं मिलती एंबुलेंस
शहरी क्षेत्र में अगर कोई दुर्घटना होती है तो वहां 108 एंबुलेंस सेवा के पहुंचने का समय 20 मिनट निर्धारित है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 25 मिनट के अंतराल पर एंबुलेंस को मौके पर पहुंचना होता है। लेकिन कई बार घंटों बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस घटनास्थल पर नहीं पहुंचती।

एएलएस की नहीं है कोई एंबुलेंस
जिले में मौजूदा समय जो भी एंबुलेंस हैं, उसमें से एक भी एंबुलेंस एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्टेड) नहीं है। सारी एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट पर आधारित हैं, जिनसे यहां काम लिया जा रहा है।

किसका क्या काम
102 एंबुलेंस सेवा प्रसूता महिलाओं को डिलीवरी के लिए अस्पताल तक लाने और ले-जाने का काम करती है। वहीं आपातकालीन स्थिति के सारे केस 108 एंबुलेंस से हैंडल किए जाते हैं। फिर चाहे वह केस किसी दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति का हो या फिर इलाके में किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति का।

हर महीने 12 से 13 हजार केस होते हैंडल
जिले में हर महीने करीब ढाई से तीन हजार केस आपातकालिक स्थिति के 108 एंबुलेंस सेवा से हैंडल किए जाते हैं। वहीं 102 एंबुलेंस सेवा से हर महीने 8 से 10 हजार केस हैंडल होते हैं। इन केसों में प्रसूता महिलाओं की डिलीवरी के बाद 42 दिनों में छह बार चेकअप के लिए मुख्यालय लाए जाने से लेकर एक साल तक नवजात बच्चे की देखभाल और इलाज कराना शामिल है।

जिले में 102 की 36 और 108 सेवा की कुल 18 एंबुलेंस उनके पास हैं। जिसे 102 व 108 के फोन काल्स पर केस हैंडल करने के लिए भेजा जाता है। उनकी सारी गाड़ियां रनिंग हालत में हैं। अभी तक कुछ केस 108 सेवा की एंबुलेंस इंगेज होने के कारण हैंडल नहीं हो पाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्रदेश सरकार ने जिले को 108 सेवा की 9 नई एंबुलेंस उन्हें और मुहैया कराई हैं, जिससे अब सारे फोन काल्स समय रहते हैंडल किए जाएंगे।
विज्ञापन

-उमाशंकर वर्मा, जिला प्रभारी, जीवीके, इएमआरआई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें