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आजादी के 73 साल बाद पहली बार चुनेंगे पंचायत की सरकार

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गोंडा के वनटांगियां ग्राम अमवा में चुनावी चर्चा करते लोग। - फोटो : GONDA
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गोंडा। आजादी के 73 साल बाद जंगलों में रहने वाले वनटांगिया परिवार के लोग पंचायत चुनाव में भागीदारी कर गांव की सरकार चुनने में सक्रिय हिस्सेदारी करेंगे। साल 2018 में राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद इन पांच गांव के 12 सौ मतदाता पंचायत चुनाव में पहली बार अपने पंसद का प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य चुन सकेंगे।
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अंग्रेजी हुकूमत के समय जंगल क्षेत्र में पौधों की देखरेख करने के लिए रखे गए मजदूर वहीं बस गए। उन्हें खेती के लिए जमीन दी जाती थी। यह जमीन वन विभाग की होती थी। इन मजदूरों को जंगल की जमीन पर कोई अधिकार नहीं था।
गांव का निवासी न माने जाने के कारण इन्हें मताधिकार का भी कोई अधिकार नहीं था। पहले वन ग्राम महेशपुर को राजस्व गांव का दर्जा मिला है। इसके बाद गांवों के लोगों में उम्मीदें जगीं। साल 2018 में प्रदेश शासन ने सभी पांचों वन ग्रामों महेशपुर, अशरफाबाद, बुटहनी, रामगढ व मनीपुर को राजस्व ग्राम घोषित कर उन्हें अन्य नागरिकों की तरह मतदान की सुविधा भी दी।
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वर्ष 2017 के पहले वनटांगिया गांव राजस्व ग्राम का दर्जा हासिल नहीं था। इसलिए सरकार की योजनाएं भी इनके लिए दूर की कौड़ी थीं। राजस्व ग्राम का दर्जा मिला तो इन गांवों की दशा एवं दिशा ही बदल गई।
वनटांगिया परिवारों की शुरुआत सन 1918 के आसपास की मानी जाती है। भारत में रेलवे का विस्तार किया जा रहा था। पटरियां बिछाने के लिए साखू की लकड़ियों की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ने लगी। नतीजा यह हुआ कि साखू के जंगल साफ होने लगे। उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत ने बड़े पैमाने पर साखू के जंगल लगाने का फैसला किया।
इसके लिए अंग्रेजों ने बर्मा की टांगिया पद्धति अपनाई। उस वक्त वन विभाग के कुछ अधिकारी बर्मा गए और वहां जाकर खेती करने की टांगिया पद्धति सीखी। भारत आकर उन्होंने गरीब और मजदूर तबके के लोगों को टांगिया पद्धति का प्रशिक्षण दिया। भारी तादाद में कामगारों को जंगल उगाने में लगा दिया। टांगिया पद्धति से वन उगाने वाले इन मजदूरों को ही बाद में वनटांगियां कहा जाने लगा।
वनटांगिया परिवारों को सरकारी सुविधा देने की पहल साल 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने शुरू की। केंद्र सरकार की ओर से आए आदेश के क्रम में उन्होंने महेशपुर गांव को राजस्व ग्राम घोषित करने की संस्तुति की और गांव में लोगों को पट्टा भी दिया।
जिससे वह खुद की जमीन पर खेती कर सकें। इसके बाद अन्य गांव को भी राजस्व गांव घोषित करने की कवायद शुरू हुई। साल 2018 में पांचों गांवों के लोगों के मन की मुराद पूरी हो सकी। अब महेशपुर, अशरफाबाद, बुटहनी, रामगढ व मनीपुर गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं की सुविधा मिलने के साथ ही मतदान का अधिकार भी मिला है।
वनटांगिया परिवारों को पंचायत चुनाव में तो पहली बार मतदान का अवसर मिल रहा है। लेकिन इसके पहले लोकसभा चुनाव 2019 में यहां के लोगों ने मतदान किया था। पहली बार वोट देने का अधिकार उन्हें साल 2018 के बाद ही हासिल हुआ था।
अब मतदान तो दूसरी बार करेंगे लेकिन पंचायत चुनाव में अपने पसंद का उम्मीदवार पहली बार चुनेंगे। साल 2019 में पहली बार ईवीएम मशीन से वोट किया था और पंचायत चुनाव में पहली बार बैलेट पेपर पर मतदान करेंगे।
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