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Gonda News: एईएस की दस्तक, दो बालिकाएं चपेट में

Tue, 10 Mar 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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एईएस प्रभावित गांव में दवा का छिड़काव करते स्वास्थ्य कर्मी। - संवाद
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गोंडा। मौसम में बदलाव के साथ ही जिले में एक बार फिर एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) ने दस्तक दे दी है। दो बालिकाओं में एईएस के लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। दोनों बालिकाओं को मेडिकल कॉलेज के पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग संबंधित गांवों में टीमें भेजकर घर-घर सर्वे करा रहा है। साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लेने के साथ ही लोगों को बीमारी के लक्षण व बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
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वजीरगंज के चेतपुर पासीपुरवा निवासी त्रिभुवन की पुत्री शालिनी (15) को तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत हुई। इसी तरह काजीदेवर के लक्ष्मनपुर गांव निवासी प्रेम कुमार की पुत्री स्वाति (11) भी तेज बुखार से पीड़ित हो गई। परिजन दोनों को मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को पीकू वार्ड में भर्ती कर लिया। जांच रिपोर्ट आने पर दोनों में एईएस की पुष्टि हुई। मामले की सूचना तुरंत सीएमओ कार्यालय भेजी गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने सीएचसी काजीदेवर और वजीरगंज के अधीक्षकों को संबंधित गांवों में टीम भेजकर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।



इसके अलावा जिला मलेरिया अधिकारी को प्रभावित गांवों में दवा का छिड़काव कराने, मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने और ग्रामीणों को बीमारी के प्रति जागरूक करने को कहा गया है।
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ये है एईएस



मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. शोएब इकबाल का कहना है कि एईएस की बीमारी कई कारणों से हो सकती है। वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण, दूषित पानी का सेवन और मच्छरों के काटने से फैलने वाले संक्रमण इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी या जी मिचलाना, शरीर में अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या दौरे पड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं।



ऐसे करें बचाव



एसीएमओ डॉ. सीके वर्मा के अनुसार एईएस से बचाव के लिए कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी है। घर और आसपास साफ-सफाई रखें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पौष्टिक और ताजे भोजन का सेवन करें। बच्चों को दूषित पानी या बासी भोजन से दूर रखें। बुखार या कमजोरी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच व उपचार कराएं।
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पिछले साल भी सामने आए थे कई मामले



स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में एईएस के 26 मरीज मिले थे। इसके अलावा जापानी इंसेफेलाइटिस के भी पांच मरीज मिले थे।
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