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Gonda News: 50 से कम बच्चों वाले 675 विद्यालयों में होगा समायोजन

Thu, 19 Jun 2025 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती के कुल 675 विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 50 से कम चिह्नित हुई है। अब नई व्यवस्था के तहत यहां पढ़ने वाले बच्चों का समायोजन निकट के दूसरे स्कूलों में किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बुधवार को देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक ने चारों जिलों के बीएसए, बीईओ के साथ बैठक कर इस संबंध में जरूरी निर्देश भी दिए। कहा कि एक जुलाई तक सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करा ली जाए।
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चारों जिलों में संचालित हो रहे कुल 8,210 स्कूलों में 33,002 प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, अनुदेशक और शिक्षामित्र कार्यरत हैं। 50 से कम संख्या वाले स्कूलों के बच्चों को निकट के दूसरे स्कूलों में समायोजित करने के लिए देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक राम सागरपति त्रिपाठी ने चारों जिलों के बीएसए व बीईओ के साथ रणनीति तैयार की है। बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि अधिकारियों का निर्देश मिलने के साथ ही विद्यालयों को समायोजित करने के लिए जिले में सर्वे शुरू कर दिया गया है।

समायोजित होने वाले विद्यालयों की संख्या

जिला- विद्यालय
गोंडा- 312

बलरामपुर-206

बहराइच- 123

श्रावस्ती- 32
(आंकड़ा स्रोत- एडी बेसिक कार्यालय )

दूसरे कार्यों में भवन होगा इस्तेमाल


बीईओ मुख्यालय आरके सिंह का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों के घटने के तमाम कारण हो सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में विद्यालय मर्ज होने से बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर पाएंगे। वहीं, विद्यालय भवन दूसरे कार्यों में भी इस्तेमाल हो सकेगा। उनका कहना है कि कई जगह आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में संचालित हो रहे हैं। उन्हें भी सुविधा संपन्न बनाया जा सकेगा।
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सभी बीएसए व बीईओ के साथ बैठक कर समायोजन के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इससे परिषदीय विद्यालयों की दशा में सुधार होगा। वहीं, बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल पाएगी।

राम सागरपति त्रिपाठी, एडी बेसिक देवीपाटन मंडल

शिक्षक संगठन भी उठा रहे सवाल

- समायोजन की कार्रवाई पर शिक्षक संगठनों ने भी सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है। दूर-दराज के गांवों में रहने वाले बच्चों को स्थानीय स्तर अच्छी पढ़ाई की सुविधा देने के लिए विद्यालय खोले गए थे। एक किलोमीटर व तीन सौ आबादी में प्राथमिक और तीन किलोमीटर व आठ सौ आबादी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाए गए थे। अब इन्हें समायोजित करने की नौबत क्यों आ रही है।
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