गोंडा। बिना देखे ही डॉक्टर ने एक मासूम को स्वस्थ बताते हुए वापस कर दिया। गुरुवार देर रात मासूम ने दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए बच्चे के घर वालों ने शुक्रवार सुबह डॉक्टर की क्लीनिक के बाहर जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया। घर वालों का आरोप था कि डॉक्टर ने पहले तो बच्चे को बगैर स्वास्थ्य में सुधार हुए ही डिस्चार्ज कर दिया और बाद में हालत बिगड़ने पर देखा भी नहीं। इससे बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया है।
शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस निवासी नितिन कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 13 अप्रैल को उनकी पत्नी अनुराधा ने ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया। नितिन के मुताबिक उस दौरान डॉ. राजेश वर्मा ने अस्वस्थ देखकर बेटे को दुखहरणनाथ स्थित आशीर्वाद नर्सिंग होम के एनआईसीयू (नेटर इंटेसिव केयर यूनिट) में भर्ती कराने की सलाह दी। नितिन ने 13 अप्रैल को ही बेटे को भर्ती करा दिया। वहां चार दिन तक डॉ. राजेश वर्मा की देखरेख में मासूम का इलाज चला। नितिन के अनुसार गुरुवार को डॉ. राजेश ने बेटे को स्वस्थ बताते हुए घर ले जाने को कहा। नितिन उसे घर ले आए। कुछ देर बाद ही मासूम की हालत बिगड़ने लगी। देर शाम को मासूम को फिर डॉ. राजेश वर्मा को दिखाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने बिना देखे ही यह कहते हुए वापस कर दिया कि बच्चा स्वस्थ है। देर रात बेटे ने दम तोड़ दिया। इससे नाराज नितिन और उसके घर वालों ने शुक्रवार सुबह गोंडा-बलरामपुर रोड स्थित डॉ. राजेश वर्मा की क्लीनिक संजीवनी डायग्नोस्टिक सेंटर के बाहर हंगामा किया। आरोप है कि अगर डॉक्टर समय रहते मासूम को देख लेते तो शायद उसकी जान बच जाती। कोतवाली नगर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। साथ ही इसकी शिकायत सीएमओ डॉ. जेपी गुप्त व अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. एसएन ओझा से भी की है।