गोंडा। परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक व व्यावहारिक शिक्षा देने के साथ ही अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए शासन के निर्देश पर यहां अंशकालिक अनुदेशक की तैनाती कर दी गई, लेकिन इसमें गाइड लाइन व मानकों की अनदेखी की गई। बिना प्रशिक्षण प्राप्त किए ही 500 अनुदेशक कक्षा छह से आठ तक के बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, जबकि अनिवार्य एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम में किसी भी शिक्षक को बिना प्रशिक्षण प्राप्त किए स्कूलों में तैनाती न देने का नियम है।
नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती के मानक तय किए गए हैं। 100 से अधिक बच्चों वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 बच्चों पर एक अध्यापक होना चाहिए। 100 छात्र-छात्राओं पर तीन सहायक अध्यापक व एक प्रधानाध्यापक तथा तीन विषय कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा के लिए एक-एक अंशकालिक अनुदेशक को तैनात करने का प्रावधान है। इसी क्रम में जिले के 100 से अधिक बच्चों वाले 201 जूनियर हाईस्कूलों में तीन-तीन अनुदेशकों की तैनाती के लिए 25 फरवरी 2013 से कार्रवाई शुरू हुई। बीते आठ अप्रैल को मेरिट सूची जारी की गई और 30 अप्रैल को जिला चयन समिति द्वारा अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग हुई। इस दौरान 503 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, लेकिन तैनाती 488 ने ही ली। स्वास्थ्य एवं शारीरिक, कला, कंप्यूटर, कृषि शिक्षा, गृह शिल्प एवं संबंधित कला, उद्यान विज्ञान एवं फल संरक्षण विषयों के लिए अनुदेशकों की तैनाती की गई। चयन के बाद इन अनुदेशकों को एक जुलाई 2013 से चयनित पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में तैनाती दे दी गई, लेकिन इन्हें प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
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ये हैं अनुदेशकों की तैनाती के नियम
1. पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशक (शिक्षक) के चयन के बाद उन्हें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में अनिवार्य रूप से पांच दिवसीय प्रशिक्षण देने का नियम है।
2. प्रशिक्षण अवधि में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित विषय कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्य शिक्षा के पाठ्यक्रम का विधिवत अनुदेशकों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
3. प्रशिक्षण के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संबंधित विषयों के अतिथि विशेषज्ञों, जो इंटरमीडिएट कॉलेज या विशिष्ट संस्थानों के प्रवक्ता स्तर से कम न हों, से प्रशिक्षण दिलाया जाना चाहिए।
4. प्रशिक्षण 16 मई 2013 से 30 जून 2013 के बीच होना था।
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सर्व शिक्षा अभियान जिला परियोजना कार्यालय की ओर से अनुदेशकों के प्रशिक्षण के लिए कोई पत्र नहीं आया था, इसलिए प्रशिक्षण नहीं दिया गया। पत्र आने पर अनुदेशकों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।’
ममता चौधरी, प्रभारी प्राचार्य डायट गोंडा
चयनित अनुदेशकों को तैनाती के बाद बीते माह प्राथमिक विद्यालय पंतनगर परिसर में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। शासनादेश के क्रम में शीघ्र ही अनुदेशकों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।’
श्रीकांत सिंह, बीएसए, गोंडा