नई गन्ना नीति से अटकी 20 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोआई
गोंडा। प्रदेश सरकार की नयी गन्ना क्रय नीति ने जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बोवाई अटका दी है। नई नीति के प्रभावी होने से इस साल चीनी मिलों ने गन्ना किसानों की रिजेक्ट वेरायटी के गन्ने की पर्ची ही नहीं जारी की है।
इससे जिले में रिजेक्ट वेरायटी का गन्ना लगे करीब 20 हजार हेक्टेयर खेत फंस गये हैं। चीनी मिलों की ओर से सिर्फ अर्ली वेरायटी के गन्ने की खरीद के लिए पर्ची रिलीज की जा रही है। ऐसे में जिले के रिजेक्ट वेरायटी का पेड़ी गन्ना बोने वाले 40 हजार किसान अपने 20 हेक्टेयर खेत में गेहूं बोने से वंचित रह जाएंगे।
ऐसे किसान हमेशा पेड़ी गन्ना पहले बिक जाने पर उस खाली होने वाले खेत में गेहूं, मसूर आदि की फसल ले लेते थे। किसानों का मानना है कि पेड़ी गन्ने के खेत में रबी सीजन की फसल लेने से उसमें कोई खरपतवार नहीं होता है।
यही नहीं इस खेत में दो तीन साल गन्ने के अवशेष के सडने से खेत को आर्गेनिक उर्वरक मिल जाने से खेत के मृदा स्वास्थ्य में काफी सुधार हो जाता है। इससे ऐसे खेत में गेहूं, मसूर आदि की फसल काफी अच्छी होती है।
किसान इसका पूरा लाभ उठाने की कोशिश में रहता है। लेकिन अब किसानों के इस मंशा पर नई क्रय नीति से पानी फिर गया है। किसानों को तगड़ा झटका लगेगा। किसान पर्ची के इंतजार में हैं, जबकि मिलों की ओर से सिर्फ अर्ली वेरायटी की पर्ची रिलीज होने से किसानों में निराशा के साथ नाराजगी पनप रही है।
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कुल गन्ना क्षेत्रफल की स्थिति
* पौधा गन्ना रकबा- 49,000 हेक्टेयर
* पेड़ी गन्ना रकबा - 24,000 हेक्टेयर
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जिले में कुल चीनी मिल्स
* बजाज चीनी मिल ।
* मनकापुर चीनी मिल ।
* मैजापुर चीनी मिल ।
नोट- गन्ना सुरक्षण नीति के तहत जिले के बार्डर एरिया का गन्ना जाता है दूसरे जिले की मिलों को।
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बोले किसान: रिजेक्ट वेरायटी न बिकने से पिछड़ जाएगी गेहूं बोवाई
गोंडा। जिन किसानों के खेत में रिजेक्ट वैरायटी का पेड़ी गन्ना लगा है वे किसान परेशान हैं। बजाज चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम बौंरिहा के किसान राजेश सिंह, राम प्रताप, रोहित सिंह व राहुल सिंह आदि किसानों का कहना है कि गन्ना पर्ची नही मिल रही है।
खेत में पेड़ी गन्ना लगा है जल्द गन्ना न बिका तो उसमें समय से गेहूं की बोवाई नही हो सकेगी। देर से बोवाई करने पर पूंजी भी डूब जाएगी। जिन किसानों के खेत में पेड़ी गन्ना है वह चाहे जिस प्रजाति का हो उसे समय से बिकने के लिए पर्ची जारी की जानी चाहिए।
मैजापुर चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसान शिव प्रसाद यादव, कृष्णावती, रामदेव तिवारी, रमेश यादव आदि किसानों का कहना है कि उनके खेत में रिजेक्ट वैरायटी का पेड़ी गन्ना लगा है। पर्ची नही मिली है जल्द पर्ची न मिली तो उस खेत में गेहूं की बोवाई पिछड़ जाएगी। चीनी मिल ने अधिकतर उन किसानों की पर्ची जारी की है जिनका गन्ना अर्ली वैरायटी का है।
गन्ना खरीद नीति के तहत जारी हुई अर्ली वेरायटी की पर्ची
नयी गन्ना खरीद नीति के तहत चीनी मिलों ने पहली अर्ली वैरायटी की पर्ची जारी की है। सबसे पहले अर्ली वैरायटी इसके बाद में सामान्य वैरायटी और फिर रिजेक्ट वैरायटी का की पर्ची रिलीज की जानी है।
शासन की मंशा है कि गन्ने की अधिक उपज हो व अधिक चीनी परता देने वाली प्रजाति के गन्ने की बोवाई बढ़े। कोई भी गन्ना बिकने से नही बचेगा। नयी गन्ना क्रय नीति में रिजेक्ट वैरायटी के गन्ने को हटा कर अर्ली व सामान्य वैरायटी के गन्ने की बोवाई को बढ़ावा देना है। ऐसे में रिजेक्ट वैरायटी के गन्ना लगे खेत में गेहूं की बोवाई पिछडना स्वाभाविक है। मिलों को समय से रिजेक्ट वैरायटी की पर्ची भी जारी करने का निर्देश दिया है।’
- पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी