गोंडा। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्यों ने लंबित मांगों को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। एसबीआई व सर्व यूपी ग्रामीण बैंक को छोड़कर सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों की करीब 110 शाखाओं में कामकाज ठप रहा। इन बैंकों में न किसी प्रकार का लेनदेन हो सका, न ही चेक क्लीयर हो सके। इससे पहले दिन करीब 90 करोड़ रुपये का चेक क्लीयरेंस फंसने के साथ हजारों उपभोक्ताओं को भटकना पड़ा।
निजीकरण व अन्य लंबित मांगों को लेकर सोमवार को आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया। पहले दिन जिले की करीब 110 बैंक शाखाओं व ट्रेड यूनियनों के कर्मचारियों ने अपनी मुख्य शाखा पर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
बैंक कर्मियों की हड़ताल के चलने जिले भर में करीब 90 करोड़ रुपये का चेक नहीं क्लीयर हो पाया। वहीं पूरे दिन पैसों के लिए उपभोक्ताओं को भटकना पड़ा।
शनिवार से बंद चल रहे बैंकों में सोमवार को हुई हड़ताल से लोगों को लगातार तीन दिन परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार को भी हड़ताल होने के चलते अब बुधवार से बैंकों में कार्य सुचारु होगा।
दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करीब दो सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। जिले के पंजाब नैशनल बैंक, कैनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक, यूको बैंकों समेत सभी बैंकों के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते करीब 110 शाखाओं में करोड़ों रुपये का लेनदेन नहीं हो सका।
वहीं 90 करोड़ रुपये के चेक क्लीयर नहीं हो सके। इंडियन बैंक इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने सोमवार को रोडवेज बस स्टॉप स्थित मुख्य शाखा के सामने प्रदर्शन किया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे एसोसिएशन के सचिव विपुल गुप्ता ने कहा कि बैंकों के निजीकरण का फैसला सरकारी आर्थिक तंत्र को नष्ट करने का पहला कदम है। सरकार का तानाशाही रवैया बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
केनरा बैंक के प्रांतीय प्रतिनिधि सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि सरकार बैंकों मेें जमा आम जनता का लगभग 100 लाख करोड़ रुपये सीधे कारपोरेट घराने को सौंपने की तैयारी में है जो एकदम आमजन विरोधी है। प्रदर्शन में डीएन सिंह, आशोक कुमार गुप्ता, राजेश कुमार, दुर्गा प्रसाद, कौशल कुमार, कृष्णा सिंह व समीर शुक्ला आदि रहे।
बैंकों का निजीकरण बंद किया जाए, आईडीबीआई बैंक को निजी कंपनी को न बेचा जाए, पांच दिन की बैंकिंग लागू की जाए, पेंशन का अद्यतनीकरण किया जाए, चाइल्ड केअर लीव शुरू की जाए, एनपीएस बंद की जाए, पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए, एलआईसी और बैंकों में महंगाई भत्ता विसंगति को दूर किया जाए, बैड लोन को रिकवर किया जाए, नई भर्ती खोली जाए, उपभोक्ता पर सर्विस चार्जेज न बढ़ाएं जाएं।
दो दिवसीय हड़ताल में एसबीआई यूनियन हड़ताल का हिस्सा नहीं रही। एसबीआई व निजी बैंकों में काम आम दिनों की तरह होता रहा। कैश का लेनदेन होता रहा लेकिन चेक की क्लीयरिंग का काम प्रभावित रहा। वहीं जिले में दोपहर बाद कई एटीएम बूथ में कैश का सूखा पड़ गया। इससे लोग पैसे निकालने के लिए शहर भर में भटकते रहे।
बैंकों की हड़ताल का पोस्टल जेसीए के सदस्यों ने भी समर्थन किया। अखिल भारतीय डाक कर्मचारी यूनियन एवं राष्ट्रीय डाक कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने भी सोमवार को हड़ताल कर विरोध जताया। इनमें राजकुमार मिश्र, सत्य प्रकाश पांडेय, वीपी सिंह, हरीश दत्त, जनार्दन दूबे, केके मिश्र, विशाल श्रीवास्तव, दिनेश कुमार व मुरलीधर मिश्र आदि शामिल रहे।