नवाबगंज ब्लाक के तुलसीपुर माझा गांव में लोहिया आवासों के आवंटन में अफसरों ने खूब दरियादिली दिखाई। अपात्रों को आवास का लाभ दिलाने के लिए यहां रेवड़ी की तरह लोहिया आवास बाटें गए।
अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पात्रता सूची में एक ही नाम को डबल दिखा दिया गया और पहली किस्त चयनित लाभार्थी को तो दूसरी किश्त अपात्र डमी के खाते में भेज दी गई। एक लाभार्थी के खाते में दो आवासों की धनराशि का आवंटन कर दिया गया।
अधिकारियों की मिलीभगत से करीब 85 लाख रुपये का गोलमाल हुआ है। ऐसे में किसी को छत नहीं मिल रही तो किसी को दोगुनी धनराशि दे दी गई। शिकायत मिलने पर डीएम ने पूरे मामले के जांच के आदेश दिए हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर व बेघर लोगों को भी रहने के लिए छत उपलब्ध हो सके इसके लिए लोहिया आवास योजना संचालित है। इसके तहत चयनित लाभार्थी को 3.15 लाख रूपये की धनराशि का आवंटन किया जाता है।
इस योजना अंतर्गत नवाबगंज ब्लाक के तुलसीपुर माझा गांव में वित्तीय वर्ष 2015-16 व 2016-17 में अफसरों ने दरियादिली दिखाते हुए कुल 199 लोगों का आवास के लिए चयन कर डाला। इस चयन में पात्र अपात्र के फार्मूले को ही दरकिनार कर दिया गया।
अपने चहेतों को लोहिया आवास का लाभ दिलाने के लिए पात्र लाभार्थी के नाम से डमी नाम भी सूची में शामिल करा दिया गया। इसके बाद पहली किश्त एक लाख 35 हजार 500 रुपए पात्र लाभार्थी तो दूसरी किश्त डमी नाम वाले के खाते में भेज दी गई।
तुलसीपुर माझा गांव की रहने वाली खुशबू पत्नी राजेश को भी लोहिया आवास का आवंटन किया गया था। इसी डमी नाम के चलते खुशबू के खाते में पहली किश्त तो भेज दी गई लेकिन दूसरी किश्त उसे नहीं मिली।
खुशबू ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए दूसरी किश्त दिलाने की फरियाद की थी। डीएम ने जब इसकी तहकीकात कराई तो उन्हें घपले का अंदेशा हुआ। डीएम ने इस पूरे मामले की जांच डीसी मनरेगा अशोक कुमार मौर्य को सौंपते हुए दस दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब की थी।
मंगलवार को डीसी मनरेगा अशोक कुमार मौर्या ने मौके पर जाकर आवास आवंटन की हकीकत की जांच की। इस जांच में करीब 27 आवास आवंटन संदिग्ध मिले हैं और तो और यहां एक ही लाभार्थी के खाते में दो आवासों की धनराशि भेजने का भी मामला प्रकाश में आया है।
इसके अलावा शिकायतकर्ता महिला लाभार्थी खुशबू भी लोहिया आवास के लिए अपात्र पायी गई है। डीसी मनरेगा का कहना है कि खुशबू के पास पहले से ही तीन कमरों का पक्का मकान है।
इसलिए उसके बैंक खाते पर रोक लगा दी गई है। बीडीओ ने उससे धनराशि वसूल किए जाने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया है। इस खुलासे के बाद आवंटित किए गए सभी आवास जांच के घेरे में आ गए हैं।