बाईपास बना न शहर के भीतर की सड़कें सुधरीं
गोंडा। शहर को नया रूप देने के लिए बनाई गई योजना जमीन पर नहीं उतर सकीं। वाहनों का दबाव कम करने के लिए बाईपास योजना कागजों में दौड़ नहीं सकीं, इसके साथ ही शहर के भीतर की टूटी और जर्जर सड़कों के कायाकल्प की तैयारी भी पूरी नहीं हो पाईं।
पूरी तरह से यह दावे हवा हवाई ही साबित रहे, जिम्मेदारी भले ही कोई न ले लेकिन जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा आज शहर की जनता भुगत रही है। बस स्टॉप हो या फिर गलियां राह चलना आसान नहीं है।
शहर में फोरलेन के अधूरे निर्माण से तो मुख्य मार्ग पथवलिया से बडगांव तक ठीक हो गया है लेकिन इसके बाद एलबीएस डिग्री कॉलेज चौराहे से बस स्टाप तक की रोड गड्ढों में खोजे नहीं मिल सकती है।
आए दिन लोग इन गड्ढों से सामना करते हैं और हादसों का शिकार भी होते हैं। इस रोड के साथ ही शहर के भीतर की सड़कों के लिए बीते वर्ष 2016-17 में एक अहम रोड स्वीकृत हुई और शिलान्यास भी हो गया।
करीब छह करोड़ की लागत से मिश्रौलिया चौकी से शहर की अवशेष सड़कों का निर्माण होना था। कार्य भी शुरू हो गया लेकिन सत्ता बदलने के बाद से कार्य ऐसे चल रहा है कि सड़क पूरी नहीं हो पाई हैं।
इससे कटहा घाट तक जाने वाली सड़क तो पूरी तरह से टूट गई है। इसी तरह सेमरा दममन और खैरा को जाने वाली रोड भी जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा शहर के बाहर-बाहर एक बाईपास रोड की कल्पना महायोजना में की गई थी उसका तो कोई बात ही नहीं करता है।
बाईपास की तर्ज पर मिश्रौलिया चौकी के बगल एक रोड बनी है जिसके मरम्मत व चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। यह रोड मंडी के वाहनों को बाहर ही बाहर आंबेडकर चौराहा, कचहरी स्टेशन, कटरा रोड आदि से जोड़ देता है लेकिन यह भी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
इसके अलावा केशवपुर पहाडवा की रोड भी नहीं सुधरी, वहां के लोगों को रास्ता बदल कर आना पड़ता है। शहर के भीतर थोड़ा सा सुधार महराजगंज मोहल्ले से मनकापुर बस स्टाप तक के रोड व एलबीएस डिग्री कालेज से झंझरी ब्लॉक तक के रोड का हुआ है। इसके अलावा अन्य का निर्माण अभी अधूरा ही पड़ा है।
शहर के भीतर बनने वाली सीसी रोड शहर के भीतर करीब सात करोड़ रुपये के बजट से बनने वाली विवादों में घिर गईं हैं और निर्माण पर रोक लगा दी गई है।
प्रधान डाकघर से आईटीआई चौराहे के साथ ही मुख्य मार्ग से गायत्री पुरम चौराहे तक के रोड की टीएसी जांच सदर विधायक के शिकायत पर हुई। उसके बाद से अधूरी रोड ही पड़ी है। इसके साथ कई अन्य कार्य भी रुके हुए हैं।
शहर में जलनिकासी का कोई प्रबंध नहीं है। सड़कों के किनारे पर इसके निर्माण के लिए कार्य की स्वीकृति होनी थी लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सकी। इसके चलते शहर के भीतर गलियों में हल्की बारिश में भी जलभराव की समस्या से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
शहर के रामदेव कहते हैं कि राजनीति के चक्कर में शहर का विकास नहीं हो पाया है। बजट तो बहुत बना लेकिन कोई कार्य आगे नहीं बढ़ा। इससे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।