मां लक्ष्मी व श्री गणेश की पूजा के साथ मना दीप पर्व
गोंडा। कार्तिक मास की अमावस्या पर दीप पर्व पर मां लक्ष्मी व श्रीगणेश की आराधना का आगाज हुआ। नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं और पूरे विधि विधान से उनकी आराधना की गई। दीपावली पर लोगों ने घर-आंगन को खूब करीने से सजाया वहीं बच्चों ने भी फुलझड़ियां जलाईं और पटाखे दागे।
मान्यता है कि भगवान राम14 वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या वापस लौटे थे तो अयोध्यावासी व अन्य स्थानों पर लोगों ने दीप जलाकर उनकी अगवानी की थी और उनकी भव्य आरती उतारी गई थी। परंपरागत रूप से यह त्योहार तभी से मनाया जाता है।
पांच दिवसीय इस त्योहार का आगाज धनतेरस से होता है जो भाई दूज तक चलता है। घरों में लोगों ने मिट्टी की गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां खरीद कर स्थापित की और दोनों की आरती उतारी। परिवार में धन, संपदा, समृद्धि आदि की कामना की और तांत्रिकों व अन्य लोगों ने मंत्रों का जाप किया।
मान्यता है कि मंत्रों को जगाने का यही अवसर होता है जब लोग दीपावली की अर्धरात्रि में मंत्र का जाप करते हैं। वहीं मसकनवा में स्वामीनारायण छपिया मंदिर में बड़े ही धूमधाम से दीपावली का त्योहार मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी दीपावली हर्षोल्लास से मनाई गई।
भगवान घनश्याम की जन्मस्थली स्वामीनरायन छपिया मंदिर के महंत वासुदेवानंद जी ने संध्या आरती के बाद लक्ष्मी पूजन, बही खाता पूजन व भगवान घनश्याम महराज की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस मौके पर पूरे मंदिर को भव्य ढंग से सजाया गया।
मंदिर की सजावट हरिभक्तों के लिये आकर्षण का केंद्र रहा। शुक्रवार को होने वाले अन्नकूट दर्शन के लिये देश-विदेश से आये सैकड़ों हरिभक्तों ने मंदिर के पवित्र नारायण सरोवर मे स्नान किया तथा पूजा अर्चना की। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
महंत स्वामी वासुदेवानंद जी ने बताया कि शुक्रवार को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा होगी तथा भगवान घनश्याम को छप्पन भोग लगाया जायेगा। इस मौके पर स्वामी हरिस्वरूपानंद, स्वामी हरिप्रकाश, माधवराम तिवारी, फूलचंद श्रीवास्तव, शैलेन्द्र तिवारी आदि मौजूद रहे।