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मुफलिसी की मार से बेबस जूडो का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

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आर्थिक तंगी के बावजूद 25 अक्टूबर को वियतनाम के लिए खिलाड़ी होगा रवाना
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गोंडा। परिवार की गरीबी और आर्थिक तंगी ने जिले के एक होनहार खिलाड़ी की प्रतिभा पर रुकावट खड़ी कर दी है। नेत्रहीन होने के बावजूद जूडो जैसी प्रतियोगिता में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाला यह दृष्टिबाधित युवक मुफलिसी की मार के आगे बेबस है।

दृष्टिबाधितों के लिए वियतनाम में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय स्तर की जूडो प्रतियोगिता में उसका चयन तो हो गया लेकिन अब आर्थिक तंगी ने वियतनाम जाने वाले रास्ते पर संकट खड़ा कर दिया है। हालांकि कुछ लोगों की मदद से यह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी 25 अक्टूबर को वियतनाम के लिए रवाना होगा। इसमें डीएम का योगदान अहम माना जा रहा है।
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जिले के हलधरमऊ ब्लॉक के रहने वाले हनोमान सिंह के घर जन्मे राजन बाबू जन्म से नेत्रहीन हैं। एक तो घर की गरीबी ऊपर से बिना रोशनी के पैदा होने वाला बेटा परिवार के लिए बोझ जैसा था। ऐसे में सर्व शिक्षा अभियान की समेकित शिक्षा राजन बाबू का सहारा बनी।

समेकित शिक्षा में दिव्यांग बच्चों के लिए चलने वाले प्री इंटीग्रेशन कैंप व ब्रिजकोर्स जैसे कार्यक्रम राजन बाबू का सहारा बने और उसने आठवीं तक की पढ़ाई इसी कैंप के जरिए पूरी की। समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक राजेश सिंह ने राजन बाबू की प्रतिभा को देख उसका एडमीशन लखनऊ के गुडंबा स्थित राजकीय स्पर्श दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज में करा दिया।

वर्ष 2014 में जब राजन इंटर में था तब उसे जूडो खेलने का शौक हुआ। राजन के मुताबिक, इस खेल ने उसे इतना प्रभावित किया कि वह इसे ही अपना लक्ष्य बना बैठा। खेल के प्रति राजन का दृढ़ निश्चय बेकार नही गया और वर्ष 2016 में गोवा में आयोजित की गई दृष्टिबाधित बच्चों की जूडो प्रतियोगिता में राजन ने गोल्ड मेडल जीता।

इसमें उसके प्रदर्शन को देखते हुए इंडियन ब्लांइड एसोसिएशन ने उसका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए कर लिया। वर्ष 2016 में राजन बाबू पहली बार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए वियतनाम गया और वहां उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए कांस्य पदक जीता।

अब वर्ष 2017 में भी वियतनाम में होने वाली जूडो की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए राजन बाबू का चयन किया गया है लेकिन इस बार मुफलिसी उसके रास्ते में बाधा बनकर खड़ी हो गई है। राजन बाबू के मुताबिक, उसे 25 अक्तूबर को नई दिल्ली से वियतनाम जाने के लिए फ्लाइट पकड़नी है मगर पैसों का इंतजाम न होने के कारण राजनबाबू बेबस है।

डीएम ने दिलाए 34 हजार रुपये
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिले को पहचान देने वाले इस दृष्टिबाधित युवक की मदद के लिए समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक एक बार फिर से उसका सहारा बने हैं। राजेश सिंह की सहायता से बुधवार को राजन बाबू ने डीएम जेबी सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की और परेशानी बताई।
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इस पर डीएम ने उसे मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने डीआरडीए के पीडी वीरपाल व बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय के साथ मिलकर 34 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई। डीएम ने आगे भी उसे मदद का भरोसा दिलाया है।
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