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3.73 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा, अलर्ट

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3.73 लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा, दहशत में ग्रामीण
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गोंडा। विभिन्न बैराजों से घाघरा नदी में छोड़े गए करीब पौने चार लाख क्यूसेक पानी की आमद से बुधवार को करनैलगंज के बाढ़ग्रस्त इलाकों में एक बार फिर तबाही का मंजर दिखाई देगा।


करनैलगंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ का पानी जहां सूखने लगा था और लोगों ने राहत की सांस ली थी वहीं अब एक बार फिर उन्हें गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।
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नेपाल की पहाड़ियों पर हुई लगातार बारिश से गिरिजा, शारदा व सरयू बैराजों का डिस्चार्ज बढ़ने के चलते सोमवार रात दो बजे तीन लाख 73 हजार 421 क्यूसेक पानी नेपाल ने छोड़ दिया है।

इसका असर बुधवार रात से यहां दिखना शुरू हो जायेगा। आने वाले 48 घंटों में घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर से भी ऊपर तक जाने के संकेत मिल रहे हैं।


इससे करनैलगंज व बाराबंकी के सरहदी इलाकों सहित एल्गिन चरसड़ी बांध की जद में आने वाले व तराई के इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने घाघरा की जद में आने वाले गांवों को अलर्ट कर दिया है।


जानकारों का कहना है कि, इस बार बरसात के मौसम में सर्वाधिक पानी नेपाल से इस बार छोड़ा गया है। सोमवार रात दो बजे शारदा बैराज से एक लाख 26 हजार 629, गिरिजा बैराज सर्वाधिक दो लाख 29 हजार 667 व सरयू बैराज 17 हजार 125 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।


कुल डिस्चार्ज तीन लाख 73 हजार 421 क्यूसेक रहा। ये सूचना मिलने के बाद प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर दिख रहा है। सिंचाई विभाग की ओर से अभियंता और कर्मी पहले से ही कटे एल्गिन ब्रिज व सकरौर बांध पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।


ऐसा पहली बार नहीं है जब नेपाल में हुई बारिश से घाघरा ने तबाही मचाई है। पिछले कुछ वर्षों से हमेशा बरसात के दिनों में नेपाली नदियों में आई बाढ़ एवं तराई क्षेत्र में भारी वर्षा का खामियाजा बाढ़ की विभीषिका के रूप में नेपाल के सीमावर्ती भारतीय जिले झेलते आ रहे हैं।


अब तक बाढ़ प्रभावित जिन लोगों ने अपने घर नहीं छोड़े थे वे अब सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर चुके हैं। मंगलवार सुबह तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.496 पर पहुंच चुका था।


जो कि खतरे के निशान से करीब 42 सेंटीमीटर ऊपर था। तो वहीं दोपहर में ये खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर ऊपर आ गया। जबकि देर शाम तक 50 सेंटीमीटर हो गया। अगले 24 घंटे में खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर तक घाघरा का जलस्तर पहुंचने का अनुमान है।


दूसरी ओर करनैलगंज नगर की सीमा से सटी सरयू नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। सरयू की बाढ़ में अब तक करीब सात ग्राम पंचायतों के 18 मजरे प्रभावित हो चुके हैं। जहां प्रशासन द्वारा नाव की व्यवस्था की गई है।


क्षेत्र के लेखपालों को गांव में ही मुस्तैद रहने को कहा गया है। हीरापुर कमियार, नारायनपुर माझा, अल्लीपुर, कचनापुर, कुर्था, सकरौरा ग्रामीण आदि गांव सरयू में आई बाढ़ के पानी से घिर गए हैं और सरयू नदी के जलस्तर का बढ़ना लगातार जारी है।


वहीं, गत दिनों सकरौर-भिखारीपुर तटबंध टूटने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।


तरबगंज विधायक प्रेम नारायन पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि बीते जनवरी माह में ही तटबंध की मरम्मत के लिए सिंचाई मंत्री सहित अन्य मंत्रियों को अवगत कराया था और इसका प्रस्ताव भी दिया था।
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मगर उनके पत्र को संज्ञान में नहीं लिया गया। इससे घाघरा सरयू के उफान को बांध नहीं झेल सका और सैकड़ों परिवारों को बेघर होना पड़ा। जबकि किसानों को बहुत हानि हुई।


उन्होंने सीएम से तटबंध टूटने के लिए जिम्मेदार व दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने तथा कार्रवाई की मांग की है।
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