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शहर के चौराहों से गांवों की चौपालों तक था आजादी का जश्न

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शहर के चौराहों से गांवों की चौपालों तक था आजादी का जश्न
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गोंडा। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने पर शहर के चौराहों से लेकर गांवों की चौपालों तक जश्न का माहौल था। आजादी की पूर्व संध्या पर ही क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने देश आजाद होने का संकेत दे दिया था।


आजादी के मसौदे की चर्चा आम हो चुकी थी। आजादी मिलने से उत्साहित जिले के लोगों ने 14 अगस्त 1947 की रात जागकर काटी। आधी रात में ही कई इलाकों में पटाखों की गूंज ने आजादी का संदेश चारों ओर फैला दिया।
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आधी रात से ही लोगों को आजादी के सूरज का स्वागत करने का बेसब्री से इंतजार होने लगा। शहर के विभिन्न चौराहों के साथ ही गांवों की गलियों और चौपालों में आजादी की चर्चाएं जोर पकड़ रहीं थीं।


स्वतंत्रता के प्रथम दिवस के साक्षी रहे लोगों की मानें तो अंग्रेजों जुल्म से त्रस्त लोगों के लिए आजादी नए जीवन से कम नहीं थी। उत्साह का आलम ये था कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के घरों पर सुबह से ही लोगों का जमावड़ा लग गया और बधाई देने का सिलसिला जारी हो गया।


कई बड़ों ने भी सेनानियों से भेंट कर उनका स्वागत किया। स्वतंत्रता की लड़ाई में हजारों ज्ञात-अज्ञात सेनानियों ने हिस्सा लिया था।


उस समय बाबू ईश्वर शरण सिंह, लाल बिहारी टंडन, चंद्रभान सिंह, बाबू द्वारिका सिंह, श्यामलाल, बलभद्र प्रसाद, नवरंग सिंह, राजेंद्र प्रताप, गयाप्रसाद पांडेय समेत सैकड़ों स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का स्वागत किया गया।


इन सभी ने तिरंगा लहराकर आजादी का स्वागत किया। कलेक्ट्रेट में ध्वजारोहण और उस समय भी जिला पंचायत में पौधरोपण हुआ था।


कटरा बाजार के पूरे बदल के तिवारीपुरवा निवासी ऋषि राम तिवारी सरल 14 अगस्त 1947 को आजादी के जश्न में शामिल हुए थे। उस समय वे 14 साल के थे और गांव से थोड़ी दूर स्थित प्राइमरी स्कूल जमुनहा में पढ़ते थे।


उन्होंने बताया कि, स्कूल पहुंचे तो शिक्षक ने आजादी के बारे में बताया और सभी बच्चों ने कागज का तिरंगा बनाया। इसके बाद जमुनहा से बच्चों के साथ गांव-गांव भ्रमण करते हुए हरैया गांव के प्राइमरी स्कूल पहुंचे।


वहां के बच्चों के साथ बैठे और आजादी के बारे में चर्चा सुनी। गांव के लोगों ने भी बच्चों का स्वागत किया। स्कूल में ग्रामीणों ने जलेबी बांटी और आजादी के जोश के साथ फिर एकसाथ नारे लगाते हुए वापस घर आए। ऋषि राम तिवारी ने बताया कि, उस समय चारों तरफ खुशियों से सभी झूम रहे थे।


झंझरी के माझा तरहर निवासी राम नरायन पांडेय आजादी के प्रथम दिन करीब 11 साल के थे। उनका कहना है कि, आजादी की खुशी में गांव के लोगों के साथ वे भी पूरी रात जाग रहे थे।


आधी रात से गांव के लोग जश्न मनाने लगे। सुबह हुई तो गांव में सब लोग गांधी चबूतरे पर एकत्र हुए। हम लोग भी पहुंचे। बच्चों में उस समय अलग ही उत्साह था।


क्योंकि अंग्रेजी जुल्म से बच्चों को लोग घरों से बाहर ही नहीं जाने देते थे। आजादी मिल रही थी तो मानो नई जिंदगी मिल रही हो। गांव के लोगों ने भोंपू (रेडियो) का इंतजाम कर रखा था।


काफी मशक्कत के बाद भोंपू बजा और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का संदेश लोगों ने सुना। खुशी मनाई और के झूम उठे। गांव के लोगों ने उस समय गुड़ बांटा और पूरे दिन जश्न का माहौल रहा।


गोंडा के पूर्व विधायक तुलसीदास राय चंदानी आजादी के पहले दिन 14 साल के थे। उस समय वे पाकिस्तान में सिंधु नदी के तट पर बसे गांव सुल्तानपुर पनाह आकिल तहसील जिला शरखर में रहते थे। स्वतंत्रता मिलने पर पूरे गांव में खुशी थी।


आजादी के पहले दिन वहां भी लोगों को मीठा खिलाकर खुशी मनाई गई। पूर्व विधायक चंदानी कहते हैं कि, उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत से मुक्ति की खुशी से सभी फूले नहीं समा रहे थे। मगर बंटवारे के दर्द से भी लोग कराह रहे थे।
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वे भारत आने पर सीधे फैजाबाद आए और वहां आरएसएस से जुड़ गए। फैजाबाद से गोंडा आकर फल का व्यवसाय शुरू किया।


1962 में पंडित अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव में हरैया सतघरवा गए और कई जिम्मेदारियों के बाद 1991, 1993 में विधायक बने। भाजपा के आठ साल अध्यक्ष रहे। उन्होंने कहा कि, उन्हें आजादी का पहला दिन आज भी याद है।
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