भूल जाइए मेन्यू, यहां ठेकेदार की शर्तों पर मिलता भोजन
कस्तूरबा स्कूलों के मेन्यू से गायब हुआ दूध, फल, पनीर व सलाद
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढने वाली बेटियों को पौष्टिक भोजन व नाश्ता देने के लिए सरकार ने भले ही मेन्यू तय कर रखा हो, लेकिन इन स्कूलों में इस मेन्यू से कोई लेना देना नही हैं। भोजन का टेंडर लेने वाले ठेकेदार ही इन स्कूलों में बनने वाले भोजन का मेन्यू तय करते हैं। सरकार के मेन्यू में शामिल दूध, फल, पनीर व सलाद इस मीनू से गायब हो चुके हैं। अब इन स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को यहां टेंडर लेने वाले ठेकेदारों की शर्तों पर ही भोजन मिल रहा है।
गरीब घर की बालिकाओं को कक्षा आठ तक की निशुल्क शिक्षा देने के लिए जिले में 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक स्कूल में पंजीकृत 100 बालिकाओं को स्कूल में शिक्षा के साथ साथ आवास व भोजन की सुविधा भी प्रदान की जाती है। विद्यालय में पढ़ रही छात्राओं को सुबह शाम नाश्ता व भोजन दिए जाने का प्रावधान है। नाश्ते व भोजन में छात्राओं को प्रतिदिन क्या दिया जाना है इसके लिए सरकार की तरफ से मीनू का निर्धारण भी किया गया है। मेन्यू के अनुसार सुबह के नाश्ते में छात्राओं को रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिनों में 200 एमएल दूध दिए जाने का निर्देश है। शाम के नाश्ते में छात्राओं को सामान्य दिनों में चाय के साथ बिस्कुट, नमकीन, गुड़ व रविवार को इस सीाी के साथ मौसमी फलों की की चाट दी जानी है। इसी तरह भोजन में बेटियों को भोजन के साथ सलाद व रायता दिया जाना है। रविवार को इन सभी खाद्य पदार्थों के अलावा गुलाब जामुन, सफेद रसगुल्ला व पनीर की सब्जी दिए जाने का निर्देश हैं। इस मीनू के मुताबिक भोजन व नाश्ता दिए जाने के लिए शासन की तरफ से प्रत्येक छात्रा प्रति दिन 50 रुपये के हिसाब से कस्तूरबा स्कूलों को 1.50 लाख रुपये प्रति माह बजट का आवंटन किया जाता है। बावजूद इसके कस्तूरबा स्कूलों में छात्राओं को मीनू के हिसाब से नाश्ता व भोजन मिलना दूर की कौड़ी है। मेन्यू में शामिल इन सारी वस्तुओं को बेटियों को परोसना तो दूर इसके दर्शन भी स्कूल में नहीं हो पाते। इन स्कूलों में बनने वाले भोजन सरकार के मेन्यू से नही बल्कि ठेकेदार के अनुसार तय किया जाता है। ठेकेदार की इस बाजीगरी में कस्तूरबा स्कूलों के मेन्यू से दूध,फल,सलाद व पनीर गायब हो चुके हैं। यहां ठेकेदार की शर्त पर ही बेटियों को भोजन मिल रहा है।
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फर्श पर सोती बेटियां, छत से टपकता पानी
गोंडा। भोजन के अलावा जिले के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में आवासीय सुविधा भी बेहद खस्ता है। छात्राओं को सोने के लिए दिए गए बेड कब के टूटकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। इन स्कूलों में पढने वाली छात्राओं को सोने के लिए बेड व चादर तक मयस्सर नहीं है। एक दरी के सहारे बेटियों को फर्श पर सोकर रात बितानी पड़ रही है। छपिया के मसकनवा कस्बे में बना कस्तूरबा विद्यालय बदहाली का शिकार है तो वजीरगंज के कस्तूरबा स्कूल की छत से पानी टपक रहा है। नवाबगंज,इटियाथोक,करनैलगंज,बेलसर,परसपुर समेत सभी कस्तूरबा स्कूलों में समसयाओं का अंबार लगा हुआ है।
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खराब गुणवत्ता पर टेंडर निरस्त कर चुकी हैं डीएम
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मनकापुर छात्राओं को खराब भोजन देने के मामले में बदनाम है। इस विद्यालय में कई बार छात्राएं खराब खाना मिलने की शिकायत कर चुकी हैं। वर्ष 2013 में जिले की तत्कालीन डीएम रहीं डॉ. रोशन जैकब इस विद्यालय का निरीक्षण किया था। डीएम के निरीक्षण में भी इस विद्यालय में खाने की गुणवत्ता काफी खराब मिली थी और उन्होंने यहां के भोजन का टेंडर निरस्त कर दिया था। पडऱीकृपाल ब्लाक के कस्तूरबा स्कूल में भी एडीएम सदर अविनाश कुमार के निरीक्षण में भोजन की गुणवत्ता खराब मिली थी। बावजूद इसके इस स्कूल में सुधार नहीं हो सका है।
वर्जन
कस्तूरबा स्कूलों में मेन्यू के मुताबिक ही भोजन दिए जाने का निर्देश हैं। अगर किसी स्कूल में निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं किया जा रहा है तो इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
-संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए