सरकारी स्कूलों की दुर्गति पर सब आवाज उठाते हैं पर इनकी व्यवस्था सुधारने पर नेता हों या अधिकारी, सभी मौन साध लेते हैं। रहीं बात जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व कर्मचारियों के बच्चों को इसमें पढ़ाने की तो प्रतिदिन चार सौ रुपये कमाने वाला भी इन स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने से कतराते हैं।
ये चाहे परिषदीय स्कूल हों या फिर शासकीय या अर्द्ध शासकीय माध्यमिक विद्यालय। सुविधाओं की बात करें तो राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोंडा व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मसकनवां में बिजली ही नहीं है। परिषदीय स्कूलों में करीब 650 भवन जर्जर हैं तो कई में शौचालय नहीं हैं। पेयजल के लिए लगे इंडिया मार्का हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।
विद्यालयों के रंग रोगन व फर्नीचर खरीद के लिए धनराशि हर बार शासन देता है लेकिन जमीं पर ये सब दिखते नहीं है। हालांकि, अब हाईकोर्ट के फैसले से सरकारी स्कूलों के दशा में सुधार आने की आस लोगों में जगी है।
बनवरिया जूनियर हाईस्कूल
झंझरी ब्लॉक में परिषदीय स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन में खिड़की गायब हैं। फर्श टूट चुकी है। टूटी फर्श पर बच्चे टाट पट्टी लगाकर भी बैठ नहीं पाते हैं। यहां बच्चों के बैठने के लिए बेंच नहीं है। परिसर में जंगली घासें उगी हैं।
भगहर बुलंद प्राथमिक विद्यालय
झंझरी ब्लॉक में स्थित स्कूल की दशा बेहद खराब है। यहां भवन पूरी तरह से जर्जर है। भवन के नीचे किसी बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता है। इस स्कूल में दो एकल कक्ष बनाए गए हैं, जिसमें बच्चों को बैठाया जाता है। यह समग्र गांव का विद्यालय है, तब ऐसी स्थिति है।
राजकीय माध्यमिक कॉलेजों में शिक्षकों की कमी
जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने वाला ही कोई नहीं है। मुख्यालय स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में 16 कक्षाएं संचालित है पर कॉलेज में मौजूदा समय कुल अध्यापकों की तैनाती 10 ही है। ऐसे में एक अध्यापक दो-दो कक्षाओं को एक साथ पढ़ाता है। उसने छुट्टी ले ली तो विद्यार्थियों की भी छुट्टी हो जाती है। कुछ ऐसा ही हाल जिले में संचालित दो राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों का भी है। इन तीनों राजकीय कॉलेजों में गणित, भौतिकी विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी, गृह विज्ञान, हिंदी, अर्थशास्त्र, संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ता ही नहीं है। इसी तरह जिले में संचालित 12 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयोें में भी सृजित पद के सापेक्ष कहीं भी अध्यापकों की तैनाती नहीं है।
जिले में स्कूलों की स्थिति
स्कूल संख्या बच्चों की संख्या
परिषदीय 3140 3,51000
राजकीय माध्यमिक 12 2500
अर्ध शासकीय माध्यमिक 42 16000
निजी माध्यमिक 274 145000
निजी कान्वेंट 1510 250000