घर-परिवार छोड़ स्वच्छता की अलख जगा रहे दो भाई
गोंडा। नाम राहुल खान, शिक्षा बीए एलएलबी। मगर नौकरी या वकालत करने के बजाय देशसेवा का ऐसा नशा चढ़ा कि आज ठेला लेकर प्रदेश में स्वच्छता की मुहिम चला रहे हैं। साथ में अपने स्नातक पास भाई रेहान को भी लगा रखा है।
सपना है कि अपना देश साफ सुथरा हो, लोग खुले में शौच जाने के बजाय शौचालय का इस्तेमाल करें। अपने इस सपने को साकार करने के लिए दोनो भाई अपने गांव, घर, परिवार से सैकड़ों किमी दूर दूसरे जनपदों में ठेले से ही जाते हैं और लोगों को सफाई व खुले में शौच करने से होने वाली बीमारियों के प्रति आगाह करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही तीन साल पहले स्वच्छ भारत अभियान का नारा देकर स्वच्छता अपनाने की मुहिम की शुरुआत की हो मगर बाराबंकी जिले के बसारा गांव के रहने वाले दो सगे भाई राहुल खान व रेहान खान पिछले सात सालों से ठेले पर सवार होकर गांव गांव स्वच्छता की मुहिम चला रहे हैं।
बुधवार को दोनों भाई ठेले पर सवार होकर जिले भीतर पहुंचे तो पहले उन्हें हर किसी ने पंचायत राज विभाग का कर्मचारी समझा मगर जब उन्होंने अपनी कहानी बताई तो हर व्यक्ति उनके जज्बे का कायल हो गया।
बसारा गांव के सेवानिवृत्त पंचायत सचिव रईस अहमद के बेटे रेहान के मुताबिक वर्ष 2010 में जब वह लखनऊ में रहकर एलएलबी कर रहे थे तो छुट्टियों में गंाव आना हुआ। गांव पहुंचने पर महिलाओं को सड़क पर शौच के लिए कतारबद्ध देखा तो सिर शर्म से झुक गया। घर पहुंचकर सबसे पहले उन महिलाओं के घर गए और उनके परिवार वालों से महिलाओं की इज्जत की खातिर शौचालय बनवाने का आग्रह किया।
लोगों ने उसे शहर का बताकर हूट किया तो उसने इस सामाजिक बुराई को मिटाने का संकल्प ले लिया। राहुल ने कठिन परिश्रम कर गांव के लोगों को समझाया और उन्हे शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद राहुल का कारवां चल निकला। बसारा के साथ आसपास के हजरतपुर, मजगवां शरीफ व गिलौली में जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया।
इस सामाजिक काम में राहुल के भाई रेहान ने भी साथ दिया। अब दोनो भाई एक साथ स्वच्छता की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका यह अभियान बाराबंकी की सीमा से निकलकर पड़ोस के जनपद बहराइच व गोंडा तक पहुंच चुका है।
पैसे के अभाव में दोनों ने ठेेले का सहारा लिया है। इसी ठेले पर सवार होकर दोनो दिनभर स्वच्छता का संदेश देते हैं और रात होने पर इसी ठेले पर सो जाते हैं। बुधवार को दोनो भाइयों ने शहर के कई मोहल्लों में जाकर लोगों को साफ सफाई के प्रति जागरुक किया। राहुल और रेहान का कहना है कि उन दोनो का सपना है कि उनका यह देश सबसे साफ सुथरे देशों में अग्रणी हो और घर की बहू बेटियों की इज्जत महफूज रहे।
राहुल ने बताया कि अगर प्रशासन उन्हें संसाधन उपलब्ध कराए तो वह यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाने को तत्पर हैं। दोनो भाई बिना किसी सरकारी मदद के अपनी हिम्मत व साहस के बलबूते यह पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को नई दिशा दे ही रहे हैं,साथ ही पंचायत राज विभाग यह भी दिखा रहे हैं कि स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए करोड़ों रुपये की नही,जज्बे की जरूरत है।
चाचा ने कहा पागल तो पिता ने घर से भगाया
राहुल के इस अभियान में अड़चने भी कम नहीं हैं। राहुल के सगे चाचा शकील अहमद तो दोनों को पागल कहते हैं। चाचा के इस व्यवहार से आहत दोनों भाई उनके बेटे की शादी में नही जा सके।
शकील की पत्नी इशरत जहां बसारा गांव की ग्राम प्रधान भी हैं लेकिन उन्होंने स्वच्छता की इस मुहिम को आगे बढ़ाने के बजाय राहुल व रेहान के काम में रुकावट ही डाली । चाचा के उकसावे पर पिता कई बार दोनों को घर से भगा भी चुके हैं मगर दोनों भाई अपने इस समाज सेवा में जुटे हुए हैं।
बहन के साथ बना अभियान का संबल
परिवार के लोग भले ही राहुल व रेहान के अभियान को पागलपन बताकर शर्मिंदा होते हो मगर उनकी बड़ी बहन सुरैया उन दोनों का संबल बनी हुई है। सुरैया ने ही दोनों को इस संकल्प को पूरा करने की प्रेरणा दी और आज भी वह दोनों भाइयों के इस अभियान में सहारा बनी हुई है। राहुल व रेहान के दोस्त भी उन्हें बराबर सहयोग कर रहे हैं।