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5706 मजरे बिजली से वंचित

Sat, 30 Jan 2016 10:28 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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पिछले सात वर्षों से जिले के 5706 मजरों के दो लाख परिवार अपने गांव में बिजली आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह मंशा केंद्र व प्रदेश सरकार के अपनाए जा रहे हथकंडों के चलते अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इन मजरों में विद्युतीकरण कराने के लिए अब तक किसी कार्यदायी संस्था का चयन नहीं किया गया है।
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दो अलग-अलग योजनाओं में जिले के 7542 मजरों को बिजली से संतृप्त किए जाने का काम दो साल से चालू तो है, पर अब तक दोनों योजनाओं में 200 गांव भी बिजली से आच्छादित नहीं हो पाए हैं। जबकि दोनों योजनाओं में विद्युतीकरण के लिए खर्च होने वाली राशि तक केंद्र सरकार से प्रदेश सरकार को अवमुक्त की जा चुकी है।

इसमें से एक योजना के तहत विद्युतीकरण का काम जहां कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम कर रही है तो वहीं दूसरी योजना के लिए अब तक किसी कार्यदायी संस्था का चयन पूर्व की कंपनी वैरीगेट को ब्लैक लिस्टेड किए जाने के बाद नहीं किया जा सका है।
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जबकि इसके लिए कॉर्पोरेशन से एक नहीं, बल्कि दो-दो बार टेंडर तक निकाले गए और दोनों ही बार यह टेंडर निरस्त हो गए। नए सिरे से 12वें प्लान में प्रस्तावित 5706 मजरों का काम जिले में कौन कंपनी कराएगी, टेंडर ब्लॉकवार आमंत्रित होंगे या फिर तहसीलवार।

इसके लिए हाल-फिलहाल कोई टेंडर अब तक नहीं निकाला गया है। जिससे आने वाले दिनों में इन मजरों का विद्युतीकरण होगा भी या नहीं, यह 5706 मजरों में रहने वाले दो लाख परिवारों के लिए एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

बीते दिनों पावर कॉर्पोरेशन के एमडी कैप कार्यालय पर 12वें प्लान में होने वाले विद्युतीकरण को लेकर बुलाई गई जिला समिति की बैठक के बाद मुख्य अभियंता कार्यालय से ब्लॉकवार विद्युतीकरण के लिए निकाले गए टेंडर को मुख्य अभियंता ने निरस्त कर दिया है।

जबकि नए सिरे से विद्युतीकरण का अब तक कोई टेंडर नहीं निकाला गया है। इससे योजना का काम लगातार पिछड़ता जा रहा है। बता दें कि इससे पहले भी एक बार विद्युतीकरण का टेंडर मध्यांचल स्तर से निरस्त किया जा चुका है।

जिले में विद्युतीकरण के लिए संचालित दोनों योजनाएं भारत सरकार की हैं। जिसका पैसा केंद्र से प्रदेश सरकार को अवमुक्त किया जा चुका है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम से चल रही आरजीजीवीवाई योजना के 11वें फेज में जहां 300 व उससे ऊपर की आबादी के मजरों का विद्युतीकरण होना है तो वहीं 12वें प्लान में 100 व उससे ऊपर की आबादी के मजरों का विद्युतीकरण किया जाना है।

भारत सरकार के ग्रामीण विद्युतीकरण मंत्रालय से जिले में होने वाले 7542 मजरों के विद्युतीकरण का काम जिले में बीते दो साल से चल रहा है। लेकिन अब तक इस योजना में 200 मजरों का भी विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। जबकि दोनों योजनाओं में होने वाले विद्युतीकरण की कुल लागत साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये के करीब है।

मुख्य अभियंता, देवीपाटन जोन हर्ष मुंशी ने बताया कि बीते दिनों जिला समिति की हुई बैठक के बाद मुख्य अभियंता कार्यालय से ब्लॉकवार आमंत्रित किए गए विद्युतीकरण के टेंडरों को निरस्त कर दिया गया था। इसलिए विद्युतीकरण को लेकर अब जो भी टेंडर निकाले जाएंगे, वह सीधे मध्यांचल विद्युत वितरण निगम से निकलेंगे।
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ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए 11वें व 12वें प्लान में प्रस्तावित मजरे
ब्लॉक        12वें प्लान       11वें प्लान
बभनजोत            431                125
बेलसर                449                106
छपिया                402                87
हलधरमऊ            381                110
इटियाथोक            344                116
झंझरी                450                122
करनैलगंज            360                80
कटराबाजार            414                109
मनकापुर            377                111
मुजेहना                251                101
नवाबगंज            356                100
पंडरीकृपाल            232                91
परसपुर                162                135
रुपईडीह            260                227
तरबगंज                393                100
वजीरगंज            444                116
कुल योग            5706                1836
नोट : 11वें प्लान के प्रत्येक मजरे की आबादी 300 व उससे ऊपर है, जबकि 12वें प्लान के प्रत्येक मजरे की आबादी 100 व उससे ऊपर है।

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