गन्ना किसानों के हाथ में मिलों ने थमाया कटोरा
तरबगंज । गन्ने का कटोरा कहे जाने वाले माझा क्षेत्र के किसानों के हाथों में मिलों ने कटोरा थमा दिया है। इससे हजारों किसानों के खेत में लगी रिजेक्टेड प्रजाति के पेड़ी गन्ना नहीं बिक पाएगा और वह रवी की बोआई से वंचित रह जाएंगे।
दोहरी मार से किसानों की कमर टूटनी तय है। इससे तरबगंज तहसील क्षेत्र के किसानों में आक्रोश पनप रहा है। क्षेत्र की एक चीनी मिल ने जहां किसानों की स्वीकृत प्रजाति की पेड़ी लेने से इनकार कर दिया है वहीं दूसरी चीनी मिल रिकवरी कम आने के डर से पेराई सत्र को देर से शुरू कर रही है। ऐसे में नगदी फसल के शीघ्र लाभ का मोह पाले किसानों को निराशा ही हाथ लग रही है।
सर्वाधिक 34 क्रय केंद्र बजाज चीनी मिल कुंदरूखी को आवंटित किया गए हैं, जबकि बलरामपुर ग्रुप की दतौली चीनी मिल को शाहपुर एट गौरिया मात्र एक गन्ना क्रय केंद्र आवंटित किया गया है। मसौधा चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हो चुका है।
लेकिन किसानों को जो सप्लाई टिकट जारी किए गए हैं उसमें अगेती प्रजाति का ही गन्ना लाने का निर्देश है। ऐसे में अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना लाने पर मिल द्वारा वापस कर दिया जा रहा है। बताते चलें कि नवाबगंज समिति अंतर्गत मसौधा चीनी मिल के अंतर्गत 953 हेक्टेयर, कुंदरूखी चीनी मिल अंतर्गत 1283 हेक्टेयर, मनकापुर दतौली अंतर्गत 14 हेक्टेयर अस्वीकृत प्रजाति की गन्ना पेड़ी का सर्वे हुआ है।
कुल मिलाकर 2250 हेक्टेयर गन्ना पेड़ी किसानों के खेत में लगी है। जिसे हर हाल में नवंबर माह में किसान बेच कर गेहूं बोना चाह रहा है। लेकिन चीनी मिल के तुगलकी फरमान से किसानों की मंशा पर तुषारापात हो रहा है।
मसौधा चीनी मिल किसानों का अस्वीकृत गन्ना की पेड़ी लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में किसान गन्ना ना बिक पाने की चिंता से खासा परेशान हैं। वहीं बजाज चीनी मिल 25 नवंबर को पेराई सत्र की शुरुआत करेगी। ऐसे में गन्ना पेड़ी ना खाली होने से किसान भारी तादाद में गेहूं बुवाई से वंचित रह जाएंगे।
तुलसीपुर माझा गांव के कमला सिंह ने बताया कि दो हेक्टयर सामान्य प्रजाति और अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना की पेड़ी तैयार है, लेकिन पर्ची नहीं जारी हो पा रही है । तुलसीपुर के ही राम सिंह ने बताया कि गांव में कुछ लोगों की जल्दी पकने वाली प्रजाति की पर्ची जारी हुई है। लेकिन अस्वीकृत प्रजाति की पेड़ी कैसे बिकेगी यह संकट बना हुआ है।
गेड़सर के शंकर दत्त शुक्ला का कहना है कि अगर शीघ्र ही मिल नहीं चली तो गेहूं की बुआई नहीं हो पाएगी। महंगूपुर निवासी किसान नेता संतोष कुमार उर्फ कक्के पांडेय का कहना है जब अस्वीकृत प्रजाति का मूल्य निर्धारण शासन ने किया है तो किसानों की पेड़ी ना खरीदने की हठधर्मिता से किसानों की कमर टूट जाएगी।
15 क्रय केंद्रों पर होनी है गन्ना खरीद
नवाबगंज गन्ना समिति अंतर्गत आने वाले गन्ना क्रय केंद्रों को इस बार भी तीन चीनी मिलों केएम शुगर मिल मसौधा, बजाज चीनी मिल कुंदरूखी तथा बलरामपुर ग्रुप की दतौली चीनी मिल को आवंटित किया गया है।
मसौधा चीनी मिल को लोलपुर प्रथम, लोलपुर द्वितीय, लोलपुर तृतीय, बालापुर एट दुल्लापुर, कटरा भोग चंद्र एट तुरकौली, कटरा भोगचंद द्वितीय एट दुर्गागंज द्वितीय, तुलसीपुर एट चौखडिय़ा, तुलसीपुर माझा चतुर्थ एट चौखडिय़ा, रांगी एट तुलसीपुर माझा, साखीपुर प्रथम एट चौखडिय़ा, तुलसीपुर माझा द्वितीय एट चौखडिय़ा, तुलसीपुर माझा प्रथम एट चौखडिय़ा, साखीपुर द्वितीय एट चौखडिय़ा, दुर्जनपुर घाट द्वितीय एट भोपतपुर, बहादुरपुर एट संगम पुरवा समेत 15 गन्ना क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं।
45 दिन अगेती प्रजाति का नियम
नवाबगंज गन्ना समिति के सचिव विक्रम बहादुर सिंह का कहना है कि सट्टा नीति में प्रथम 45 दिन अगेती प्रजाति का गन्ना ही खरीदने का नियम निर्धारित है।
किसानों की पीड़ा जायज है, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। हां छोटे किसानों का गन्ना हर हाल में दिसंबर तक खरीदने का नियम है, जिसे हर हाल में पालन कराया जाएगा।
परता कम आता है
मसौधा चीनी मिल के उप गन्ना प्रबंधक हेमंत सिंह का कहना है की अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने में रिकवरी काफी कम है। गन्ना किसानों का कैलेंडर जारी है। उसी हिसाब से खरीद की जाएगी। अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना वापस कर दिया जाएगा।
25 नवंबर से शुरू होगी मिल
बजाज चीनी मिल के यूनिट हेड पीएन सिंह का कहना है कि बजाज चीनी मिल 25 नवंबर से पेराई सत्र की शुरुआत करेगी। किसानों को यथा संभव सहूलियत उपलब्ध कराई जाएगी। रिकवरी प्रतिशत कम है। इसीलिए चीनी मिलों के चलने में देरी हो रही है कैलेंडर के हिसाब से गन्ना खरीदा जाएगा।
सीएम से मिलकर बताएंगे किसानों का दर्द
भाजपा विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने बताया कि भाजपा सरकार किसानों के हित के लिए हर संभव कदम उठाएगी। मिलों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी।
माझा क्षेत्र के किसानों की आय का प्रमुख साधन गन्ना और गेहूं है। गेहूं की बुआई अगर कम हुई तो किसानों की हालत बदतर हो जाएगी। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे।