छह नदियों के आगोश में बसे गोंडा जिले का पेयजल लगभग पूरी तरह दूषित हो गया है। पिछले दो साल में जिले भर के सभी गांवों में कराए गए सर्वेक्षण में साफ हो चुका है कि यहां का पेयजल दूषित है और पानी में आयरन, आर्सेनिक, फ्लोराइड, क्लोराइड सहित अन्य खतरनाक रसायन मौजूद हैं। खास कर नदियों के इर्द-गिर्द।
इस रिपोर्ट के आधार पर नीर निर्मल परियोजना के तहत प्रदेश के पूर्वांचल के दस जिलों का चयन हुआ, जिसमें गोंडा भी शामिल है। यहां 40 ग्राम पंचायतों में 37 ओवर हेड टैंकों का निर्माण होना है। इससे करीब 50 हजार परिवारों को शुद्ध पेयजल मिलेगा।
एक-दो स्थानों पर कार्य भी शुरू हो गया है। लेकिन करीब एक अरब रुपये की लागत से बनने वाली टंकियों के पानी का सेवन ग्रामीण तभी कर सकेंगे, जब इसके लिए वह जलकर चुकाएंगे। साथ ही पेयजल के लिए कनेक्शन लेना होगा, जिसके लिए कुछ राशि खर्च करनी होगी।
भारत सरकार, विश्व बैंक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से इस परियोजना के तहत एक ओवर हेड टैंक के निर्माण पर दो करोड़ 61 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें 50 प्रतिशत राशि विश्व बैंक द्वारा, 33 प्रतिशत राशि भारत सरकार एवं एक प्रतिशत रकम ग्रामीणों को खर्च करनी होगी।
जिन गांवों में ओवर हेड टैंक का निर्माण होगा, वहां छह सदस्यीय पेयजल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में ग्राम प्रधान, सचिव सहित अन्य चार सदस्य हर माह बैठक करेंगे। प्रत्येक परिवार को कितनी राशि जलकर के रूप में चुकानी होगी, इसकी रूपरेखा भी तय करेंगे। हालांकि प्रत्येक परिवार के लिए मिनिमम 50 रुपये जलकर की राशि रखी गई है। लेकिन यदि गांव में परिवार की संख्या कम होगी तो जलकर की रकम बढ़ाई भी जा सकती है।
यदि ग्रामीणों को शुद्ध पानी का सेवन करना है तो उसके लिए पहले कनेक्शन लेना होगा। कनेक्शन के लिए अलग-अलग दर निर्धारित है। पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य के लिए 450 रुपये तथा अनुसूचित जाति एवं बीपीएल परिवार को 225 रुपये देने होंगे। इसके अलावा निर्धारित राशि हर माह स्वच्छता समिति को देनी होगी, जिससे बिना बाधा के उनको शुद्ध पानी मिलता रहे।
निर्मल नीर लोगों को मिलता रहे, इसके लिए ग्राम पंचायत को ही ओवर हेड टैंक की जिम्मेदारी संभालनी होगी। निर्माण के एक साल तक जल निगम इसका संचालन करेगा। इसके बाद ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया जाएगा। हैंडओवर करने के बाद इसका बाकायदा रजिस्टर होगा। ट्यूबवेल संचालक की भर्ती करनी होगी तथा रखरखाव, मेंटीनेंस व संचालक का मानदेय भी स्वच्छता समिति को ही भुगतान करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब ग्रामीण लगातार जलकर देते रहेंगे।
कई वर्षों में त्वरित ग्रामीण पेयजल योजना, स्वजल धारा योजना के तहत यहां करीब तीन दर्जन ओवरहेड टैंक बनाए जा चुके हैं, लेकिन इनसे आज तक ग्रामीणों को एक बूंद पानी नहीं मिल सका है। ये सारी टंकियां अब केवल शोपीस बनी हैं। कहीं पाइप लाइन नहीं है तो कहीं पाइप लाइन फटी है। कहीं संचालक नहीं हैं तो कहीं देखरेख के अभाव में ये बेकार हो गई हैं। कुछ स्थानों पर इनका निर्माण ही पूरा नहीं हो पाया है। स्वजल धारा योजना के तहत दत्तनगर बिसेन, भदवा सोमवंशी, बेलावां, महादेवा, पिपरा भिटौरा, मूड़ा डीहा, बक्सरा आज्ञाराम सहित अन्य गांवों में ये टंकियां बनी हैं, मगर ये कभी चली नहीं।
नीर निर्मल परियोजना के तहत टंकियों के निर्माण के लिए राशि मिल गई है। स्थल का चयन भी हो गया है। निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया है। इससे करीब 50 हजार परिवारों को शुद्ध पेयजल मिलेगा। -यशवंत सिंह, जिला विकास अधिकारी, नोडल पेयजल मिशन