गोंडा। शहर में सफाई के लिए पर्याप्त इंतजाम होने के बाद भी गंदगी का दाग नहीं धुल रहा है। नगर पालिका में 400 कर्मचारी हैं और उनके वेतन व मानदेय पर 60 लाख का बजट महीने भर में खर्च हो रहा है। इसके बावजूद 27 वार्डों व शहर के चौक चौराहों पर गंदगी की भरमार है। यह भी तब है जब बीते दो वर्ष में 40 करोड़ रुपये सफाई के संसाधन पर खर्च हो चुके हैं। कहीं जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं घटिया निर्माण के चलते नाला ढहने से सड़कों पर गंदगी फैली है। आलम यह है कि जरा सी बारिश होने पर सड़कें लबालब हो जाती हैं। अब सवाल उठ रहा है कि दो लाख की आबादी वाले शहर की सफाई के लिए कितना बजट चाहिए। पेश है रोहित तिवारी की रिपोर्ट-
बनते ही ढहा 22 लाख का नाला
शहर में निर्माण कार्यों में हो रही अनियमितता से पर्दा अब खुलने लगा है। शहर के स्टेशन रोड पर लोहिया धर्मशाला से जिला अस्पताल के बीच 22 लाख से हो रहा नाला निर्माण अनियमितता की भेट चढ़ गया है। नाले के निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग होने से नाला ढह गया। बात यहीं खत्म नहीं हो ही है। नाला तो पास हो गया और करीब-करीब बन भी गया, लेकिन नाले का पानी कहां निकाला जाये यह बहुत बड़ी चुनौती है। नगर पालिका और विनियमित क्षेत्र के बीच में सरकारी धन का गलत जगह उपयोग किया जा रहा है। कोई नक्शा नहीं, कोई मानक नहीं फिर भी नाला पास कर दिया गया।
जरा सी बारिश में खुली सफाई व्यवस्था की पोल
ाहर में हल्की सी बारिश तो शहर के सफाई व्यवस्था की पोल खोल देती है। नपाप ने बारिश का मौसम आने से पहले ही सभी नालों और नालियों की सफाई व्यवस्था की ढोल पीट रही है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। कही पॉलीथिन से नाले चोक हैं तो कहीं नालियां अतिक्रमण के चलते गायब हो गई हैं। बारिश के बाद शहर में दुखहरन नाथ मंदिर से ईदगाह होते हुए गुड्डूमल चौराहे तक पहुंचने में काफी मसक्कत करनी पड़ती है। दोपहिया वाहन और चार पहिया वाहन तो किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन रिक्शा और पैदल चलने वालों को बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ता है। इसी तरह साहबगंज मोहल्ले में, महरानीगंज घोसियाना, ददुआ बाजार, बड़गांव, रानी बाजार, पंतनगर स्थित कांशीराम कालोनी, सिविल लाइन स्थित कांशीराम कॉलोनी, गायत्री पुरम, मालवीय नगर, सुभाष नगर, आवास विकास प्रथम, आवास विकास द्वितीय, जिगरगंज, सुभाषनगर स्थित कांशीराम कालोनी, राजा मोहल्ला, विष्णुपुरी कालोनी और छेदी पुरवा की स्थिति बहुत ही खराब है। लोगों का निकलना दुश्वार हो गया है।
डस्टबिन रखने की जगह निर्धारित नहीं
शहर मे कूड़ा प्रबंधन को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। नपाप ने डस्टबिन रखने की जगह निर्धारित नहीं की है। कहीं सड़क पर ही तो किसी दुकान के बगल ही रख दिया है। लोगों को इससे काफी दिक्कतों का सामना करता पड़ता है। लोग कूड़ा डस्टबिन के बजाय सड़क पर फेंका जाते हैं, जिससे लोगों को निकलने में काफी दिक्कत होती है। शहर में जहां भी देेखें सब सड़क पर ही डस्टबिन रखी गई है।
जगह-जगह लगा रहता कूड़े का ढेर
शहर के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां पर सफाई व्यवस्था बिल्कुल नहीं हो रही है। शहर का सबसे वीआईपी वार्ड हाउसिंग कालोनी व आवास विकास है जहां सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों का आना जाना लगा रहता है लेकिन सफाई व्यवस्था यहां छू तक नहीं गई है। टामसन कॉलेेज से अफीम कोठी तक जाने वाली सड़क पर हमेशा कूडे़ का ढेर लगा रहता है। सफाई कर्मी रोज कूड़ा हटाते हैं, लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। पंतनगर कांशीराम कॉलोनी में मुड़ते ही कूड़ा फैला रहता है और नाली का पानी सड़क पर भरा रहता है। वहीं सुभाष नगर में कांशीराम कॉलोनी की स्थिति तो बिल्कुल दयनीय है। पीने के पानी से लेकर घरों का गंदा पानी निकलने की व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे उसी गंदे पानी से होकर गुजरते हैं और बीमार हो जाते हैं। उसी जगह पर बड़ा सा कूड़ा अड्डा बना हुआ है। जो हमेशा बीमारी पैदा करता है। शहर में स्वच्छता की मुहिम तो चलती है कभी कागजों में तो कभी कुछ कार्य होकर बंद हो जाती है। लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिखता है।
फैक्ट फाइल
- शहर की आबादी 2011 की जनगणना के हिसाब से 1.50 लाख है।
- शहर में 20 हजार मकान पंजीकृत हैं, जिनसे गृहकर और जलकर लिया जाता है।
-200 कर्मचारी आउट र्सोसिंग पर मानदेय पर हर माह खर्च-14 लाख रुपये
-200 कर्मचारी नियमित पर हैं जिनके वेतन हर माह खर्च-40 लाख रुपये
- शहर की सफाई व्यवस्था की मानीटरिंग के लिए दो सफाई निरीक्षक का पद है
- 27 वार्डों के लिए 27 सुपवाइजर रखे गये हैं।
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत 27 वार्डों में 2000 शौचालय का निर्माण कराया गया है जिसके निर्माण में 1 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च हुआ है।
- शहर में 80 डस्टबिन 1250 लीटर की रखी गई है जिसकी लागत- 20 लाख रुपये
- शहर में 44 डस्टबिन 4250 लीटर की बड़े कूडे अड्डे पर रखी गई जिसकी लागत- 22 लाख रुपये
- 27 वाडों के लिए ट्विन्स विंग डस्टबिन 235 रखी गई है जिसकी लागत-16 लाख 45 हजार रुपये
- शहर में 10 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया है जिसकी लागत- 2 करोड़ रुपये
- शहर में 10 पुराने शौचालय का पुर्ननिर्माण कराया गया है जिसकी लागत- 1 करोड़ रुपये है।
- घर-घर कूड़ा उठाने के लिए 14 गाड़िया, जिसमें टैंपो, टाटा ऐस और ई-रिक्शा शामिल है।
बोले शहरवारी, कूड़ा निस्तारण की नहीं समुचित व्यवस्था
शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर शहरवासियों में काफी निराशा है। किसी के घर नाली का पानी भरा है तो कि सी के दुकान के सामने ही डस्टबिन रख दी गई है। अधिवक्ता राहुल त्रिपाठी ने बताया कि लोहिया धर्मशाला के सामने छेदी पुरवा वार्ड का पानी निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। जैसे-तैसे हम लोग मोहल्ले से बाहर निकल रहे है। वीरेंद्र्र त्रिपाठी का कहना कि मोहल्ले में पानी हमेशा भरा रहता है। नाली का पानी घर के अंदर और किचन में आ जाता है। जिससे काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस समस्या का निदान कब होगा। मो. अहमद ने कहा कि हमारे दुकान के एक बगल खुला ट्रांसफार्मर रखा है और दूसरी तरफ कूड़ा इकट्ठा करने की डस्टबिन रख दी गई है। नपाप में कई बार इसकी शिकायत की है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। माधुरी सिंह ने कहा कि कूड़ा फेंकने के लिए कोई जगह निर्धारित नहीं है। कूड़ेदान कहीं भी रख दिया गया है। सीमा गुप्ता ने बताया कि पॉलीथिन पर किसी प्रकार से रोक नहीं है आये दिन नाली चोक हो जा रही है। जिसके चलते नाली का पानी सड़क पर भर जाता है। मंटू सोनी ने बताया कि कूड़ा निस्तारण के लिए कोई प्रबंध नहीं है। कूड़ा उठाकर एक जगह डंप कर दिया जाता है।
शहर के लगभग सभी वार्डों में घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था की बात चल रही है। अभी कुछ वार्डों में व्यवस्था नहीं है। जल्द ही कूड़ा उठाने की व्यवस्था की जायेगी। कूड़ा निस्तारण को लेकर शासन स्तर पर बात चल रही है जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलती है जगह चिन्हित कर कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा। -विकास सेन, अधिशासी अधिकारी नपाप