जिले में राशन कार्ड शुल्क के रूप में वसूल किया गया करीब 37 लाख रुपये बूथ लेबिल अधिकारियों (बीएलओ) की दबंगई में फंस गया है। विभागीय अधिकारियों ने भी वसूली गई रकम को दबा लिया।
सरकारी खजाने में पैसा न जमा कराने पर जब डीएम आशुतोष निरंजन ने अधिकारियों को चेतावनी दी तो विभाग ने बीएलओ से वसूली गई रकम को जमा करवाने का प्रयास करने के बजाए उचित दर विक्रेताओं को ही बलि का बकरा बनाना शुरू कर दिया।
विभाग के अधिकारियों की ओर से उचित दर दुकानदारों को राशन कार्ड का पैसा देने के लिए तलब किया जाने लगा है। इसको लेकर दुकानदार परेशान हैं। शासन के निर्देश पर इस साल सभी राशन कार्ड धारकों को नया कम्प्युटराइज्ड राशन कार्ड मुहैया कराया गया है।
विभाग की ओर से अब तक तैयार हो चुके करीब 75 फीसद राशन कार्ड का वितरण करने का दावा कर रहा है। राशन कार्ड वितरण के लिए ग्राम पंचायतवार बीएलओ को लगाया गया था। एक राशन कार्ड का 10 रुपये शुल्क कार्डधारकों से राजस्व शुल्क के रूप में जमा कराया गया।
इस कार्य के पर्यवेक्षण के लिए लेखपालों को लगाया गया था। वसूल किये गये रकम का मात्र छह लाख 97 हजार 494 रुपये जमा किया गया। बाकी रकम को बीएलओ दबाए बैठे हैं।
इस सरकारी राजस्व के न आने पर डीएम आशुतोष निरंजन ने जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को राशन कार्ड का शुल्क वसूली की बकाया रकम को रिवाल्विंग फंड में जमा कराने का निर्देश देने के साथ कार्य में शिथिलता न बरतने की चेतावनी दी।
डीएम का सख्त रुख देखा तो विभागीय जिम्मेदारों में तेजी आ गई। इसमें डीएसओ समेत खाद्य अधिकारियों व निरीक्षकों ने उचित दर विक्रेताओं से अपने गांव के कुल राशन कार्ड का शुल्क जमा कराने का फरमान जारी कर उन्हें तलब करना शुरू कर दिया है।
इससे उचित दर दुकानदारों में असन्तोष है। पिछले चार दिन से जिला व क्षेत्रीय कार्यालयों पर उचित दर विक्रेता पहुंच रहे हैं। डीएसओ दफ्तार आये करीब एक दर्जन उचित दर विक्रेताओं का आरोप था कि हर मामले में विभागीय अधिकारी दुकानदारों को ही दबा कर वसूली करवाते हैं।
उनका कहना था कि काम करना है तो चुप रहना भी उनकी मजबूरी है लेकिन जो पैसा हमने नही जमा कराया उसे हम जमा करेंगे तो राशन को खुले बाजार में बेच कर देना होगा।