गोंडा। बेसिक शिक्षा के जूनियर हाईस्कूलों में चार साल पहले नियुक्ति पाए सहायक अध्यापकों में 34 शिक्षक हटाए जाएंगे। सितंबर 2015 में गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक के 608 पदों पर सीधी भर्ती हुई थी। इसमें स्नातक में गणित व विज्ञान विषय के साथ ही बीएड व जूनियर हाईस्कूल स्तर की टीईटी उत्तीर्ण लोगों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई थी।
इसमें उस समय बीटेक, बीएससी कृषि के बाद बीएड डिग्री वालों को भी गणित व विज्ञान के बराबर मान कर नियुक्ति दे दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने गणित व विज्ञान के बराबर इन तकनीकी शिक्षा की डिग्री को नहीं माना। इसके बाद अब इन डिग्री धारकों को सेवा से हटाने की कार्रवाई की जा रही है। जिले में 34 शिक्षक कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
बेसिक शिक्षा के जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए वर्ष 2012 में सीधी भर्ती से गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की कार्रवाई शुरू हुई थी। विभाग ने 29825 शिक्षक भर्ती से जिले में गणित विषय के 304 व विज्ञान विषय के लिए भी 304 सहायक अध्यापक के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई जो वर्ष 2015 में सितम्बर माह में पूरी हो सकी।
23 सितंबर 2015 को गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापक की नियुक्ति का आदेश जारी हुआ। इसमें बीटेक के बाद बीएड करने वालों को गणित स्नातक व कृषि से स्नातक उत्तीर्ण को विज्ञान के ग्रुप में शामिल किया गया। इन बदलावों के बाद सहायक अध्यापक के चयन बीटेक व कृषि शिक्षा से स्नातक व प्रशिक्षित लोगों का चयन हो गया।
चार सालों से सहायक अध्यापक के रूप में इस दायरे से चयनित लोग कार्य कर रहे हैं। इसी बीच वर्ष 2019 जुलाई माह में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश जारी हुए। इस आदेश में गणित व विज्ञान विषयों से स्नातक को ही नियुक्ति के लिए पात्र माना।
इसके बाद बीटेक और कृषि शिक्षा से स्नातक से नियुक्ति पाए शिक्षक चिन्हित किए जा रहे हैं। इसके दायरे में 34 सहायक अध्यापक आए हैं और उन्हें सेवा से हटाए जाने की कार्रवाई शुरू कर दिया गया है। अभी सभी को नोटिस जारी किया गया है और 13 जनवरी तक जवाब मांगा गया है। इसके बाद सेवा से हटाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन ही हुईं थीं नियुक्तियां
जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन ही हुईं थीं। शिक्षकों को जारी किए गए नियुक्ति पत्र में ही स्पष्ट कर दिया गया था कि नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन रहेंगी। समय-समय पर कोर्ट से जारी निर्देशों का पालन भी हुआ। अब नए आदेश से 34 शिक्षकों की नियुक्ति ही खतरे में पड़ गई है।
पद से हटेंगे लेकिन पाए वेतन की नहीं होगी रिकवरी
जूनियर हाईस्कूलों में शैक्षिक पात्रता के चलते सेवा से तो 34 शिक्षक हटेंगे लेकिन उनसे वेतन की रिकवरी नहीं होगी। उनकी पहले भी नियुक्ति न्यायालय के आदेश पर ही हुई थी और उनकी सेवाएं न्यायालय के अधीन ही रहीं।
ऐसे में अब सेवाओं से तो हटाया जाएगा लेकिन चार सालों में दिए गए वेतन की रिकवरी नहीं की जाएगी। माना जा रहा है कि वेतन उन्हें काम के बदले दिया गया है और चयन में चयनित की ओर से कोई अनियमितता नहीं की गई है।
तैयार हो रही शिक्षकों की सूची, सुनवाई का मिलेगा अवसर
जूनियर हाईस्कूलों में गणित व विज्ञान से 608 सहायक अध्यापकों का चयन वर्ष 2015 में किया गया था। जिसमें उस समय 380 शिक्षकों ने योगदान दिया और बाद में 22 लोगों का चयन हुआ। इसके बाद बीते साल 2017 में न्यायालय के आदेश पर चयनित होने के बाद भी जिन लोगों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया था उन्हें एक अवसर दिया गया।
इसके बाद 40 से 50 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण किया। बीच में कुछ लोग दूसरी सेवाओं में चुने जाने से छोड़ दिए। मौजूदा समय में 450 के करीब सहायक अध्यापक कार्यरत हैं। जिनमें से 34 शिक्षकों को चिन्हित किया गया है। जिन्हें सुनवाई का अवसर मिलेगा।
जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों का चयन वर्ष 2015 में हुआ था। सेवाएं न्यायालय के आदेश के अधीन हैं। शासन के आदेश पर ऐसे सहायक अध्यापकों को चिन्हित किया गया है और उनको पूरी जानकारी देकर निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है।
-मनिराम सिंह, बीएसए