जिले के 7672 बच्चों को बाल श्रम से मिलेगी आजादी
नया सवेरा योजना के जरिए शिक्षा से जोड़े जाएंगे बच्चे
श्रम विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी जिम्मेदारी
उमानाथ तिवारी
गोंडा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चिन्हित किए गए 7672 बाल श्रमिकों को कामकाजी जीवन से मुक्त कराकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद शुरु हुई है। सरकार ने इन बच्चों के जीवन की नई शुरुआत के लिए नया सवेरा योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत चिन्हित किए गए बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति दिलाकर उन्हें स्कूलों में दाखिल कराया जायेगा। शासन के इस काम में बच्चों की बेहतरी के लिए काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनीसेफ भी सहयोग प्रदान करेगी। इसके लिए गांवों में दो प्रभावशाली व्यक्ति/स्वयंसेवकों का चयन कर उनकी मदद से बच्चों को स्कूल पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इन स्वयंसेवकों के चयन की जिम्मेदारी श्रम विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 85 गांवों में 7672 नौनिहाल मजदूरी कर अपने परिवार को पालने मेें लगे हुए हैं। रोजगार के कारण यह बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से अलग हैं। इस रिपोर्ट के बाद श्रम विभाग ने इन गांवों को हाट स्पाट के रूप में चिन्हित किया है। श्रम विभाग ने इन चिन्हित किए गए गांवों के बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने की कवायद के क्रम में नया सवेरा योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत चिन्हित गांवों में दो प्रभावशाली व्यक्ति/स्वंयसेवकों का चयन कर उन्हे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर स्कूल तक लाने की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी। स्वंयसेवकों के चयन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी गई है। सरकार की इस मुहिम में अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनीसेफ भी सहयोग प्रदान कर रही है। यूनीसेफ संस्था ने सभी ब्लाकों में एक एक तकनीकी रिसोर्स पर्सन की तैनाती कर दी है। यह तकनीकी रिसोर्स परसन गांवों से चयनित होने वाले स्वयंसेवकों को बच्चों को बाल रम से मुक्त कराकर उन्हे शिक्षा से जोड़ने में सहयोग प्रदान करेंगे।
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प्रदेश भर में 21.76 लाख बाल श्रमिक
गोंडा। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक पूरे प्रदेश में 21.76 लाख बाल श्रमिक कामकाज में लगे हैं। यह संख्या पूरे देश में सर्वाधिक हैं। श्रम विभाग ने प्रदेश के बरेली, कानपुर नगर, इलाहाबाद, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गाजियाबाद, आगरा, मुरादाबाद, बंदायू, लखनऊ, बाराबंकी,वाराणसी, सोनभद्र व मिर्जापुर समेत 20 जिलों को बाल श्रम से सर्वाधिक प्रभावित माना हैं। इन जिलों के कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए श्रम एवं सेवायोजन मंत्रालय ने 12 जून 2017 को नया सवेरा योजना का शुभारंभ किया गया है।
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प्रथम चरण में इन 14 जिलों में लागू होगी योजना
बरेली, कानपुर नगर, इलाहाबाद, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, वाराणसी, सोनभद्र व मिर्जापुर।
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चिन्हित 85 गांवों में होगा दो स्वयंसेवकों का चयन
गोंडा। जिले के सर्वाधिक बाल श्रमिक वाले जिन 85 गांवों को चिन्हित किया गया है उन गांवों में बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने व उन्हे शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए गांव से दो प्रभावशाली व्यक्तियों/स्वंयसेवकों का चयन किया जायेगा। यह स्वयंसेवक उसी गांव के मूल निवासी होंगे। स्वंयसेवकों के चयन में अनुसूचित जाति,पिछड़ी जाति व अल्पसंख्यक जाति के लोगो को प्राथमिकता दी जायेगी। चयनित किए गए स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण भी दिलाया जायेगा। हालांकि इन्हें कोई मानदेय नहीं देय होगा। इन स्वंयसेवकों के चयन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी गई है। विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक का आयोजन कर इन स्वयंसेवकों का चयन किया जायेगा।
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इन ब्लाकों में हैं सर्वाधिक बाल श्रमिक
ब्लाक प्रभावित गांवों की संख्या बाल श्रमिकों की संख्या
मनकापुर 15 1574
कटरा बाजार 13 1373
परसपुर 12 929
करनैलगंज 08 857
रुपईडीह 08 709
मुजेहना 07 634
पंडरीकृपाल 09 609
हलधरमऊ 05 371
वजीरगंज 04 325
इटियाथोक 04 291
योग- 85 7672
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नया सवेरा योजना के क्रियान्वयन के लिए सोमवार को श्रम विभाग व बेसिक शिक्षा विभाग की बैठक का आयोजन किया गया है। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद योजना के क्रियान्वयन पर कार्रवाई शुरु की जायेगी।
संतोष कुमार देव पांडेय,बीएसए