गोंडा नगर पालिका परिषद के विस्तार की मांग पिछले काफी समय से चल रही है, लेकिन निकायों का परिसीमन न होने से जिन सटे क्षेत्रों को शहरी लाभ मिल रहा है, उनको नगर का नहीं माना जा रहा है। जनगणना 2011 में इन तीनों ग्राम पंचायतों को शहरी आबादी में जोड़ दिया गया है।
अब परिसीमन के बाद नपाप में शामिल होना शेष है। इस बार पंचायतों के परिसीमन के बाद लोगों में आस जगी है कि अगला निकाय चुनाव होने से पहले परिसीमन होना तय माना जा रहा है। नगर पालिका गोंडा का विस्तार न होने से यहां करीब 30 हजार आबादी को धक्के खाने पड़ रहे थे।
जनगणना 2011 में गोंडा नगर पालिका परिषद की आबादी एक लाख 14 हजार हो गई है। जबकि नगर पालिका से सटीं तीन ग्राम पंचायतें जानकीनगर, गिर्द गोंडा व पूरे तिवारी को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
नगर के चारों तरफ गिर्द गोंडा का फैलाव है और सिविल लाइन, मेवातियान, इमामबाड़ा सहित अन्य मोहल्लों में पेयजल, बिजली आपूर्ति का लाभ इन अर्ध शहरी लोगों को मिल रहा है। चूंकि ये ग्राम पंचायत में दर्ज हैं, लेकिन इनकी गिनती शहर में होती है। शहर में जगह न होने के कारण यहां के लोगों का विस्तार आसपास गांवों में हो गया है।
2015 के अंत में होने जा रहे पंचायत चुनाव के पहले शासन ने पंचायतों का पुनर्गठन का कार्य किया। पूरे प्रदेश में पंचायतों के पुनर्गठन के लिए कराए गए परिसीमन में सैकड़ों ग्राम पंचायतें बढ़ गईं। हालांकि गोंडा का मामला न्यायालय में लटका है।
इसके बावजूद जिले में करीब दो सौ ग्राम पंचायतें बढ़ी हैं। 2017 में गोंडा नगर निकाय का चुनाव होना है। इसके पहले निकायों का परिसीमन होना तय माना जा रहा है। परिसीमन होने पर तीन ग्राम पंचायतें जानकीनगर, गिर्द गोंडा व पूरे तिवारी नगर पालिका परिषद एरिया में शामिल हो जाएंगी।
जनगणना 2011 में इन तीनों ग्राम पंचायतों को शामिल कर लिया गया है। इसमें गोंडा नगर पालिका परिषद की आबादी 114046 है, जबकि जानकीनगर की आबादी 10195, गिर्द गोंडा की आबादी 14391 तथा पूरे तिवारी की आबादी 4809 है।
शहरी क्षेत्र की गणना में आईं इन तीनों ग्राम पंचायतों में होटल, बैंक, डाकखाना, हजारों व्यावसायिक प्रतिष्ठान, उद्योग यहां तक कि तीन पेट्रोलियम डिपो, फिल्म थिएटर आदि स्थापित हैं। यहां तक कि इन तीनों ग्राम पंचायतों में नगरीय विकास अभिकरण की योजनाओं से विकास भी कराए जा रहे हैं।
पूरे शिवा बख्तावर, छावनी सरकार, परेड सरकार, भट्ठा परेड, उदईपुरवा, गरीबी पुरवा, रानीजोत, जयनगरा सहित अन्य गांव और भी हैं, जिन्हें शहरी लाभ मिल रहा है, लेकिन इन्हें अरबन में शामिल नहीं किया गया है। इनकी आबादी भी करीब 30 हजार से अधिक है, लेकिन ये अरबन क्षेत्र में शामिल नहीं हैं।
निकायों का परिसीमन बहुत दिन से लटका है। परिसीमन होने से जो ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में शामिल हैं, उन्हें उसका लाभ मिल सकता है। इस बार संभावना है कि निकाय चुनाव से पहले निकायों का पुनर्गठन होगा और जनगणना में अरबन में शामिल ग्राम पंचायतों को नपाप में शामिल किया जा सकता है। हालांकि यह निर्णय शासन का होगा, लेकिन संभावना अधिक है कि निकायों का परिसीमन होगा। -त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी-प्रशासक नगर पालिका परिषद गोंडा