गोंडा। सरकारी नलकूपों को संचालित रखने के लिए शासन से मिले करीब तीन करोड़ के बजट में गोलमाल मामले की जांच अब तीन अफसरों की टीम करेगी। अयोध्या के मुख्य अभियंता सुरेश पांडे की निगरानी में तीन अफसरों की संयुक्त टीम जिले के सरकारी नलकूपों के रखरखाव और मरम्मत के बजट में हेराफेरी की जांच करेगी। जिले में 591 सरकारी नलकूपों के लिए मिले बजट में बड़े स्तर पर हेराफेरी की शिकायत मुख्यमंत्री से हुई थी। उनके आदेश पर जांच तो शुरू हुई लेकिन आगे नही बढ़ सकी। इसके बाद मामला प्रमुख सचिव के सामने भी पहुंचा, पूर्व में चल रही जांचों में ढिलाई होने पर शासन ने पूरे मामले की जांच का आदेश दिया और अयोध्या के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है।
नलकूप खंड के जिम्मे 591 नलकूपों को संचालित रखने के लिए बजट दिया जाता है। हर साल इस बजट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला गूंजता रहता है लेकिन अधिकारियों की सेटिंग-गेटिंग से कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। इस बार भाजपा के किसान मोर्चा के अवध क्षेत्र के महामंत्री सूर्य नरायण तिवारी ने मामले की पूरी शिकायत मुख्यमंत्री से की और प्रमुख सचिव से भी भेंट करके सरकारी नलकूपों के बजट में फर्जीवाड़े की शिकायत की। फर्जी वर्क ऑर्डर पर बड़े पैमाने पर बजट को खर्च दिखाए जाने की बात भी सामने आ चुकी है।
सरकार से मिले बजट में बड़े पैमाने पर हुए गोलमाल
वर्ष 2017 से 2019 के बीच करीब पांच करोड़ का बजट नलकूप खंड को शासन से मिला। प्रति नलकूप 38 हजार रुपये की दर से दो करोड़ 47 लाख रुपये मिले, लेकिन नलकूपों के मरम्मत के कार्य नहीं हुए। बिना तालाबों में पानी भरे ही बिल बाउचर तैयार कर बजट निकाल लिया है। वर्ष 2017.18 में 4 नए नलकूपों की स्थापना के लिए 49 लाख 93 हजार रुपये का बजट मिला था। नलकूपों के पम्प हाउसों का निर्माण तो हो गया लेकिन अन्य कार्य का बजट निकालने के बाद भी कोई कार्य नहीं कराया गया है। वर्ष 2017-18 में 19 नलकूपों पर कार्य कराने के लिए 61 लाख रुपये का बजट मिला। इसमें सिर्फ तीन नलकूपों के गूलों का ही निर्माण कराया गया। कई नलकूपों का बजट फर्जी तरीके से निकाल लिया गया। इसी वर्ष 25 लाख रुपये का बजट अन्य नलकूपों के लिए मिलाए उसमें भी गोलमाल हुआ। वर्ष 2018-19 में नवीन नलकूप योजना में 30 लाख रुपये के भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वर्ष में एक करोड़ रुपये का बजट भी एमएंड आर मद में मिला। जिसे भी बाउचर तैयार कर निकाले जाने का आरोप है। यह सभी मामले जांच में शामिल है।
कई और मामले भी जांच के दायरे में आए
नलकूप खंड में वर्क आर्डर 40 हजार रुपये तक का ही जारी करने का आदेश है। इसे दरकिनार करते हुए तीन लाख से अधिक का आपूर्ति आदेश जारी कर दिया गया। यह कई चक्र में किया गया। इसके अलावा एक लिपिक की टीआई खोलकर बेजा लाभ देने का मामला भी जांच के दायरे में है। निजी वाहन हायर कर डीजल का दुरुपयोग भी किए जाने की जांच होगी और बिना नियमों के वाहनों को संबद्ध करने का भी आरोप है। विभाग में कई कर्मचारियों को तबादले के बाद भी कार्यमुक्त न करके संबद्ध कर रखा गया है। यहां के अवर अभियंता केके पटेल व शैलेंद्र यादव का स्थानांतरण नलकूप खंड नानपारा में हो चुका है लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
गड़बड़ियों की होगी जांच
नलकूप खंड के गड़बड़ियों के शिकायत की जांच मिली है। शासन के आदेश के तहत हर बिंदु की जांच की जाएगी। आरोपों से जुड़े अभिलेखों को मांगा जा रहा है, जल्द ही जांच को आगे बढ़ाएंगे। -सुरेश पांडे, मुख्य अभियंता अयोध्या (जांच अधिकारी)