गोंडा। जिले के तीन हजार स्कूलों में नामांकित 3.68 लाख बच्चों को ठंड में जूते-मोजे नहीं मिल सके हैं। दिल्ली और हरियाणा की सीमा पर किसानों के आंदोलन से जिले के बच्चों के जूते-मोजे फंसे हुए हैं।
शासन ने ठंड से पहले ही स्वेटर देने के साथ ही जूते-मोजे देने की व्यवस्था दी थी। स्वेटर का वितरण तो हो रहा है और करीब-करीब बच्चों को मिल गया है लेकिन अभी जूते नहीं बंट सके हैं।
विभाग को अभी मांग के अनुरूप जूतों की आपूर्ति नहीं हो पाई है। इससे वितरण ही नहीं हो पाया। आए जूतों के सैंपल की जांच भी अभी नहीं हो पाई है। जिले को जूते-मोजे की आपूर्ति हरियाणा की एक फर्म को करना है और वहां पर किसानों ने सीमा बंद कर रखा है। इससे जूते नहीं आ पा रहे हैं।
बच्चों को जूते के साथ मोजा दिए जाने के लिए शिक्षकों की ओर से बच्चों की संख्या विभाग को पहले ही उपलब्ध करा दी गई है। शासन को भी जिले से छात्रों की संख्या भेज दी गई है। इस बार छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है। तीन लाख 68 हजार बच्चों को स्वेटर के साथ ही जूते-मोजे दिए जाने थे।
अभी तक पूरी तरह जूते व मोजे नहीं आने से वितरण ही नहीं हो पाया है। हरियाणा में किसानों के आंदोलन के चलते जूते नहीं आ पा रहे हैं। इसके लिए विभाग को भी रिपोर्ट भेजी गई है। कोरोना काल में भी एक जुलाई से स्कूल खोले गए। मिड-डे मील का राशन, कुकिंग की लागत देने का कार्य किया गया।
किताबें बंटवाईं और अब स्वेटर भी बांट रहे हैं। समय पर जूते-मोजे आ गए होते तो इसी दौरान अभिभावकों को दे दिया गया होता। बार-बार अभिभावकों को स्कूल न बुलाना पड़ता। लेकिन बार-बार अभिभावकों को स्कूल बुलाकर टुकड़ों में योजना का लाभ दिया जाता है जिससे अभिभावक भी तनाव में हैं। काम छोड़कर उन्हें स्कूल का ही चक्कर लगाना पड़ रहा है।
लागत कम करने के चक्कर में टेंडर में हुई देरी
शासन की तरफ से जूतों के लिए टेंडर जारी करने में देरी हुई है। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। बताया जा रहा है कि इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम कीमत में में जूते मंगाए जा रहे हैं।
वहीं, जूते-मोजे वितरण का कार्यक्रम तय न होने की वजह से भी यह अटका रहा। अब टेंडर भी फाइनल हुआ और एक जोड़ी जूता 87 रुपये में व दो जोड़ी मोजा 12 रुपये में दिए जाना तय हुआ तो अब दूसरा खेप आ ही नहीं पा रहा है। शासन स्तर से हुई देरी का खामियाजा ठंड में जिले के नौनिहाल झेल रहे हैं।
सत्र समाप्ति की ओर और अभी तक नहीं मिला बस्ता
कोविड़ 19 का संकट होने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सिर्फ बच्चों की छुट्टी किया। शिक्षकों को वह जुलाई से स्कूल बुला रहा है और उनसे बच्चों से जुड़ी योजनाओं के साथ ही स्कूलों के कार्य करा रहा है।
बच्चों को किताबें तो दे दी गईं लेकिन किताबों को सुरक्षित रखने के लिए बस्ता नहीं दिया जा सका है। इस बार बच्चों को विभाग की तरफ से बस्ते भी नहीं मिले है। जिला समन्वयक विनोद जायसवाल कहते हैं कि अभी बस्ता उपलब्ध नहीं हुआ है। शासन से निर्देश मिलने के बाद वितरण की कार्रवाई की जाएगी।
कुछ जूते आ गए हैं लेकिन पूरे जूते अभी नहीं मिले हैं। जूतों के सैंपल की जांच के लिए समिति का गठन किया जा रहा है। जांच होने के बाद जूते-मोजे का वितरण शुरू करा दिया जाएगा। बाकी जूते आते ही वितरण पूरा करा दिया जाएगा।
- डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए