गोंडा। ठंड का मौसम बीत रहा है फरवरी माह में मौसम सामान्य होने का पूर्वानुमान है। ठंड के समय ही जिले के तीन हजार स्कूलों में नामांकित 3.68 लाख बच्चों को ठंड में जूते-मोजे दिए जाने थे। इसके लिए बाकायदा शासन से आदेश भी जारी हुए, लेकिन अभी तक बच्चों को जूते-मोजे नहीं मिल सके हैं।
शासन से जिले को जूते 92 फीसदी और 73 फीसदी मोजे आकर डंप हैं। विभाग को अभी मांग के अनुरूप जूतों की आपूर्ति नहीं हो पाई है। इससे वितरण ही नहीं हो पाया। आए जूतों के सैंपल की जांच भी अभी नहीं हो पाई है। जिले को जूते-मोजे की आपूर्ति हरियाणा की एक फर्म को करना है।
सौ फीसदी मिलने पर ही जूते और मोजे का सत्यापन होगा। जिला समन्वयक विनोद जायसवाल का कहना है कि जो जूते और मोजे अवशेष हैं वह भी जल्द ही मिल जाएंगे। इसके बाद सत्यापन कराकर वितरण करा दिया जाएगा। इस बार छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है।
तीन लाख 68 हजार बच्चों को स्वेटर के साथ ही जूते-मोजे दिए जाने थे। कोरोना काल में भी एक जुलाई से स्कूल खोले गए। मिड-डे मील का राशन, कुकिंग की लागत देने का कार्य किया गया। किताबें बंटवाईं और अब स्वेटर भी बांट रहे हैं। समय पर जूते-मोजे आ गए होते तो इसी दौरान अभिभावकों को दे दिया गया होता, तो उन्हें बार-बार स्कूल का चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
शासन की तरफ से जूतों के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने में देरी की गई। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। बताया जा रहा है कि इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम कीमत में में जूते मंगाए जा रहे हैं।
टेंडर भी फाइनल हुआ और एक जोड़ी जूता 87 रुपये में व दो जोड़ी मोजा 12 रुपये में दिए जाना तय हुआ तो आपूर्ति में दिक्कत आ गई। समय से आपूर्ति न किए जाने से बच्चों को समय से जूते- मोजे नही मिल सके हैं। शासन स्तर से हुई देरी का खामियाजा ठंड में जिले के नौनिहाल झेल रहे हैं।
बेसिक स्कूलों के बच्चों को जूते- मोजे के साथ ही स्कूल बैग भी दिया जाना था। बच्चों को किताबों दे दिए गए लेकिन अभी तक बैग ही नहीं दिया गया। सरकार ने स्कूल बैग देने के लिए भी बजट तय किया था। किताबों के देने के बाद बैग न दिए जाने से किताबें बच्चे सही ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। उन्हें इंतजार है कि जल्द से जल्द स्कूल बैग भी मिल जाएगा।