फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटे 25 हजार मुकदमे

Sat, 12 Dec 2015 10:45 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्षों से लंबित वादों के निस्तारण के लिए शनिवार को दीवानी न्यायालय में फरियादियों की भारी भीड़ उमड़ी। हर दिन से हटकर न्यायालय परिसर में एक कैंप के जरिए अदालत का प्रभारी जनपद न्यायाधीश रामानंद ने शुभारंभ किया। इसके बाद बैंक, राजस्व, बीमा, मोटर दुर्घटना, विद्युत अधिनियम, फौजदारी सहित अन्य मामलों के 25 हजार मुकदमों की एक ही छत के नीचे लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई हुई, जिसे लेकर पूरे दिन दीवानी न्यायालय में लोगों की आवाजाही से मेले जैसा माहौल रहा।
विज्ञापन


सुबह 10 बजे से शुरू हुई यह राष्ट्रीय लोक अदालत सायं पांच बजे खत्म हुई। इस दौरान सुनवाई के लिए आने वाले सभी 25 हजार मुकदमों की न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई करते हुए उन तमाम वादों का सुलह समझौते से निस्तारण कर दिया, जिसके लिए वादकारियों को वर्षों से न्यायिक अधिकारियों की चौखट के चक्कर काटने पड़ रहे थे।

शनिवार को दीवानी न्यायालय में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में जहां मोटर दुर्घटना के सैकड़ों वादों का निस्तारण हुआ तो वहीं इनमें एक मामला 111 साल के बुजुर्ग रामसुख वर्मा का भी था, जिनके बेटे संतराम की इसी साल उतरौला रोड स्थित सिसईअंदूपुर गांव के नजदीक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। द्
विज्ञापन


रुतगामी न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश विष्णुकुमार शर्मा ने 111 साल के बुजुर्ग रामसुख वर्मा के पुत्र संतराम की मृत्यु के वाद का निस्तारण करते हुए वादी संतराम सहित उसके परिवारीजनों को साढ़े तीन लाख रुपये का क्लेम दिलाया।

लकड़ी की अवैध कटान के एक मामले में मनकापुर निवासी शंकर बीते 16 वर्षों से न्यायालय का चक्कर काट रहे थे। शनिवार को लगी लोक अदालत में अपने वाद का निस्तारण किए जाने के लिए शंकर ने तीन दिन पहले ही अपना प्रत्यावेदन दिया था।

इसके वाद का निस्तारण शनिवार को लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों ने शंकर के इकबालिया बयान के आधार पर जुर्माना लगाकर कर दिया, जिससे उसे 16 साल पुराने वाद से पलक झपकते ही छुट्टी मिल गई।

वहीं, मनकापुर कोतवाली क्षेत्र में हुई लकड़ी की अवैध कटान के दो अन्य मामलों का भी निस्तारण इस लोक अदालत में हुआ। इसमें एक वाद वर्ष 2004 का था तो दूसरा वर्ष 2007 का।

वर्ष 2010 से लंबित चल रहे मारपीट के एक वाद का निपटारा शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में जुर्म इकबाल के आधार पर हुआ।

इस वाद में एसीजेएम प्रथम के न्यायाधीश ने प्रतिवादी सुखदेव के इकबालिया बयान पर पूरा केस न्यूनतम अर्थदंड के आधार पर निस्तारित कर दिया। जिसमें सुखदेव के साथ तीन अन्य लोग प्रतिवादी थे।

शनिवार को दीवानी न्यायालय में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारियों को सस्ता और सुलभ न्याय मिले, इसके लिए पूरे दिन प्रभारी जिला जज से लेकर, लोक अदालत के नोडल अधिकारी विष्णु कुमार शर्मा, विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीशों सहित अभियोजन निदेशालय से राष्ट्रीय लोक अदालत के संयोजक नियुक्त किए गए ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी राकेश पांडेय और उनकी पूरी टीम पल-पल इसकी जानकारी लेती रही।

साथ ही बार व सिविल बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी एक-एक गतिविधि पर अपनी नजर बनाए रहे। जुर्माने के मामलों में किसी से ज्यादा पैसा तो नहीं लिया जा रहा। इसकी भी सभी अधिकारी समय-समय पर जांच करते रहे।

शनिवार को दीवानी न्यायालय में लगी लोक अदालत में जहां बैंक रिकवरी के तौर पर 2.24 करोड़ रुपये की वसूली हुई, तो वहीं 93 लाख 13 हजार 976 रुपये की लागत के उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किए गए।

जबकि विभिन्न मुकदमों में 6 लाख रुपये जुर्माने के साथ ही मोटर दुर्घटना से संबंधित पुराने व नए वाद में 54 लाख 89 हजार 500 रुपये का प्रतिकर वादी पक्ष को दिलाया गया।
विज्ञापन


साथ ही वर्षों से पारिवारिक विवादों में फंसे दो दंपतियों के मामलों का निस्तारण करते हुए उन्हें साथ रहने के लिए भी राजी किया गया।




विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें