मनकापुर (गोंडा)। आईटीआई मनकापुर में कार्यरत 243 अधिकारी व कर्मचारियों ने एक साथ वीआरएस ले लिया। कभी एशिया की शान कही जाने वाली आईटीआई मनकापुर की हालत इतनी खराब हो गई कि अब वहां कार्य करने वाले कर्मचारी व अधिकारियों को पाई-पाई का मोहताज होना पड़ा। आईटीआई को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी नहीं हुआ। नतीजा यह रहा कि यहां काम करने वाले 243 अधिकारियों व कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया।
आईटीआई में सहायक प्रबंधक पद पर कार्यरत भवानी फेर दुबे ने बताया कि मऊ गांव में स्थित आईटीआई लिमटेड फैक्ट्री काफी लागत से वर्ष 1983-84 में स्थापित हुई थी। लगभग बीस वर्ष फैक्ट्री ढंग से चली, काफी अच्छा परफार्मेंस रहा, लेकिन बीते दो दशक से फैक्ट्री को काम मिलना धीरे-धीरे कम हो गया। इससे फैक्ट्री के कर्मचारियों को कई महीने से वेतन के लाले लग गए। फैक्ट्री में काम न होने की दशा में मैनेजमेंट द्वारा बीते एक वर्ष में इस फैक्ट्री के 80 कर्मचारियों का तबादला बंगलौर, रायबरेली, रांची उड़ीसा जैसे स्थानों पर कर दिया गया।
ऐसे स्थित में कर्मचारियों ने सरकार से एक मुश्त पैसे के साथ वीआरएस की मांग करने लगे। भारत सरकार ने कुछ स्कीम व शर्त के साथ वीआरएस लेने पर मंजूरी दे दी। सरकार के इस स्कीम के तहत बीपी दुबे, यूपी सिंह, प्रवीण सिंह, अजित सिंह, अशोक सिंह, जय प्रकाश मिश्रा, पीआरओ आर के जायसवाल, दया शंकर यादव, रमा श्रीवास्तव, प्रेमा पाल दुर्गा त्रिपाठी आदि 243 अधिकारी व कर्मचारियों ने एक साथ वीआरएस लेकर आईटीआई को अलविदा कह दिया। इसमें अधिकतर कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने रिटायरमेंट से 7-8 वर्ष पहले ही बीआरएस ले लिया है। प्रबंधक मानव संसाधन (एचआर) वाईएस चौहान ने बताया कि सभी कर्मचारियों ने भारत सरकार द्वारा दिए गए स्कीम के तहत वीआरएस लिया है। अब भी फैक्ट्ररी में 650 कामगार कार्यरत हैं, लेकिन फैक्ट्ररी में कोई नया प्रोजेक्ट लगे तो कामगारों को काम मुहैय्या हो सकेगा।