आठ साल में नहीं चल सकी मेमो ट्रेन, नई ट्रेन भी नहीं मिली
गोंडा। पूर्वांचल के आदर्श स्टेशनों में शामिल गोंडा रेलवे स्टेशन को भी मुकाम हासिल नहीं हो सका है। आठ साल से मेमू ट्रेन चलाने की उम्मीद जगी और लाइन के विद्युतीकरण का कार्य भी हो गया, लेकिन मेमू ट्रेन नहीं चल सकी।
लखनऊ से बाराबंकी तक ट्रेन आती है, लेकिन गोंडा तक विस्तार की कार्ययोजना फाइलों में ही कैद है। इसके साथ ही पांच साल में जिले को न तो कोई नई ट्रेन मिली और न ही अहम ट्रेनों के ठहराव की मांग ही पूरी हो सकी।
प्रयागराज तक के सफर के लिए गोंडा स्टेशन से कोई ट्रेन नहीं है, इसके लिए मनकापुर जाना पड़ता है। इसी तरह बिहार से दिल्ली तक चलने वाली ट्रेनों के साथ ही कई अहम ट्रेनें ऐसी हैं जिनके ठहराव का प्रयास नहीं हो पाया।
इससे जिले के यात्रियों में दर्द छलक रहा है। लखनऊ जाने के लिए दोपहर में कोई ट्रेन ही नहीं है, दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच लखनऊ जाने वालों को सड़क मार्ग का ही सहारा है।
गोंडा स्टेशन पूर्वांचल के स्टेशनों में आदर्श स्टेशन है। यहां छह प्लेटफार्म के साथ ही डीजल शेड तक है। लाइनों का जाल है और मुख्य स्टेशन से थोड़ी दूरी पर ही कई छोटे-छोटे स्टेशन हैं।
इसके बावजूद यहां ट्रेनों के संचालन की उम्मीदें पूरी नहीं हो पाई हैं। आठ साल पहले से लखनऊ से गोंडा तक मेमू चलाने की कवायद शुरू हुई थी जो आज तक पूरी नहीं हो सकी।
मेमू चलने से यात्रियों को कम समय में लखनऊ पहुंचने की उम्मीद पूरी होती। पैसेंजर ट्रेन से ज्यादा वक्त लगता है। इसके अलावा दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक लखनऊ के सफर के लिए कोई ट्रेन ही नहीं है।
महत्वपूर्ण तो ये है कि दरभंगा से आनंद बिहार दिल्ली तक चलने वाली सप्तक्रांति ट्रेन, सहरसा (बिहार) से दिल्ली तक चलने वाली बिहार संपर्क क्रांति, दरभंगा से दिल्ली तक चलने वाली गरीब रथ ट्रेन का ठहराव बीते कई साल से मांग के बाद भी गोंडा स्टेशन पर नहीं हो रहा है।
इसी तरह भीलवाड़ा से चलकर गोंडा होते हुए बिहार जाने वाली जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस का ठहराव भी नहीं हो पाया। सूर्यप्रकाश शुक्ल कहते हैं कि जिले के नेताओं ने इन अहम ट्रेनों के ठहराव के लिए प्रयास ही नहीं किये। कई ट्रेनों का ठहराव अन्य जिलों के स्टेशनों पर होने लगा।
गोंडा से प्रयागराज जाने के लिए अब तक कोई ट्रेन ही नहीं चलाई जा सकी है। वह भी तब जब गोंडा से बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज तक का सफर करते हैं। इस तरह रेलवे ने यहां की जनता को निराश ही किया और जनप्रतिनिधि भी उदासीन ही रहे।
बहराइच तक बड़ी लाइन की शुरुआत हो गई है, लेकिन इससे कोई अधिक लाभ नहीं मिला है। बहराइच के यात्रियों को गोंडा आकर आगे के सफर के लिए दूसरी ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
बहराइच से लखनऊ या गोरखपुर के लिए सीधे रेल सेवा ही नहीं है। माना जा रहा है कि बहराइच से गोंडा होते हुए लखनऊ व गोरखपुर तक की सेवा शुरू होने से बहराइच व गोंडा के यात्रियों की रुचि ट्रेन यात्रा में दिखती।
मगर उन्हें गोंडा आकर ही ट्रेन बदलनी पड़ रही है। जिले में अभी भी सात रेलवे क्रॉसिंगों पर कोई गेट नहीं है और ये मानवरहित क्रॉसिंग की श्रेणी में हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।