अफसरों की लापरवाही ने फंसाई 800 बुजुर्गों की पेंशन
गोंडा। अफसरों की लापरवाही ने जिले भर के करीब 800 बुजुर्गों की पेंशन फंसा दी है। ब्लाकों पर तैनात अफसर इनके आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं कर रहे हैं। सत्यापन न होने से बुढापे में पेंशन मिलने की राह दुश्वार हो गई है। बुजुर्ग पेंशन के लिए विकास भवन स्थित दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बुजुर्गो को समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर आङ्खनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन करने के बाद इन्हे सत्यापन के लिए ब्लाकों पर भेजा जाता है।
बीडीओ स्तर से होने वाले इस सत्यापन की रिपोर्ट मिलने के बाद ही समाज कल्याण विभाग इन आवेदन पत्रों को संस्तुति के साथ अग्रसारित करता है। इसके बाद पेंशन की रकम सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जीती है।
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 2500 बुजुर्गों ने पेंशन के लिए आवेदन किया है। इनमें से करीब 800 आवेदन ऐसे हैं जो सत्यापन के अभाव में ब्लाकों पर अटके हुए हैं। ब्लाकों पर तैनात अफसर इनका सत्यापन कराना ही जरूरी नहीं समझते।
वहीं आवेदन करने के बाद बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटना शुरु कर देते हैं। समाज कल्याण विभाग के अफसरों के मुताबिक ग्राम पंचायत का सचिव ही इसके सत्यापन की रिपोर्ट उपलब्ध कराता है मगर निचले स्तर पर इसकी कोई मानिटरिंग नही की जाती। जिससे आवेदन पत्र सत्यापन के अभाव में अटके रह जाते हैं।
जिले के 78000 बुजुर्गों को मिल रहा पेंशन का लाभ
गोंडा। समाज कल्याण विभाग की तरफ से संचालित वृद्धावस्था पेंशन बुजुर्गों के बुढापे की लाठी बनकर साथ निभा रही हैं। जिले के 78000 बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हे पेंशन का लाभ मिल रहा है। पेंशन के रूप में प्रतिमाह मिलने वाली चार सौ रुपये की रकम इनके लिए किसी तोहफे से कम नही हैं। इस वित्तीय वर्ष में इन लाभार्थियों को पेंशन की तीन किश्ते मिल चुकी हैं।
सत्यापन रिपोर्ट गलत मिलने पर रोकी जाती पेंशन
गोंडा। बुजुर्गों की पेंशन रोके जाने के सवाल पर जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि पेंशन पाने वाले प्रत्येक लाभार्थी का प्रतिवर्ष सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन का उद्देश्य मृतकों व अपात्रों का पता लगाना होता है।
इस सत्यापन के दौरान अगर कोई गलत तथ्य सामने आता है तो ही पेंशन रोकी जाती हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में ही करीग सात हजार लाभार्थी मृतक पाए गए थे। सत्यापन रिपोर्ट के बाद उन सभी की पेंशन को रोका गया था।