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डेंगू-कीचड़ और गंदगी के बीच दहशत में जी रहे लोग

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डेंगू से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियां सिफर
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। प्रदेश सरकार ने भले ही डेंगू बीमारी को महामारी घोषित कर दिया हो, लेकिन जिले में स्वास्थ्य विभाग ने इस महामारी से निपटने के लिए कोई रोडमैप नहीं तैयार किया है। जिसकी वजह से डेंगू को लेकर लोग दहशत में है। पिछले साल इसी डेंगू बुखार से जिले में दो दर्जन से ऊपर लोगों की जान चली गई थी। बावजूद इसके पानी में पनपने वाले इसके मच्छरों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अपने पुराने ढर्रे पर ही हैं। आए दिन हो रही बारिश से शहर से लेकर देहात तक का हाल कीचड़य़ुक्त है। जिसमें डेंगू, मलेरिया के मच्छर तेजी से पनपते हैं। हालांकि सीएमओ डॉ. आभा आशुतोष का कहना है कि मच्छरजनित बीमारियों पर अंकुश लगाने के लिए रोज ही किसी न किसी सीएचसी-पीएचसी के इलाके में दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। जबकि सभी सीएचसी में 5-5 मच्छरदानियां भी इसे लेकर लगवाई गई हैं।
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24 ने गंवाई जान तो 500 ने कराया इलाज
पिछले साल जिले में बीते ढाई महीनों के भीतर डेंगू बुखार की चपेट में आने से 24 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। मरने वालों में छपिया के हडिय़ा गांव में रहने वाले तीन साल के बच्चे से लेकर, धानेपुर की गुंजा, परासराय के रोडवेज क्लर्क, अफीमकोठी के गिरीश कुमार, मनकापुर के रिटायर्ड स्वास्थ्यकर्मी, विधायक बावन सिंह का भतीजे सहित दो लोग, राधाकुंड के रहमुल्ला के बेटे के अतिरिक्त करनैलगंज और उमरी इलाके के 16 लोगों की जानें गई थीं। जबकि इन 24 मौतों के अलावा तकरीबन 500 लोग डेंगू से बीमार हुए थे।
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किट है वार्ड भी, पर कोई नहीं कराता इलाज
जिले मे डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास किटें तो है, लेकिन इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद इससे बीमार लोग अपना इलाज कराने लखनऊ चले जाते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू के इलाज के लिए पांच बेड का एक वार्ड आरक्षित है। लेकिन इस वार्ड में पिछले दो वर्षों से एक भी डेंगू का मरीज भर्ती नहीं हुआ। प्रभारी संीएमएस डा. संतोष कुमार का कहना है कि डेंगू से बीमार लोगों के लिए जिला अस्पताल में पांच बेड का एक वार्ड आरक्षित है।
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वायरल बीमारी है डेंगू
डेंगू का वायरस 4 प्रकार का होता है। डेंगू बुखार से मरीज के ठीक होने के बावजूद उसे इसकी बीमारी लंबे समय तक रहती है। जिससे वह फिर से हावी हो सकता है। दोबारा से डेंगू बुखार होने पर वह ज्यादा घातक होता है। यह खाने या छूने से नहीं फैलता। एडिस इज्पिटी नामक मच्छर के काटने से इसकी बीमारी फैलती है। डेंगू मच्छर के काटने के बाद अगर कोई मच्छर डेंगू पीड़ित व्यक्ति को काटता है तो उस मच्छर से यह बीमारी दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। इसके मच्छर दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं। इनके शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ज्यादा ऊपर इसके मच्छर नहीं उड़ पाते। ठंडे और छांव वाले स्थान पर यह ज्यादा रहते हैं। पर्दे के पीछे और अंधेरी जगहों पर भी इनका निवास होता है। घर के अंदर रखे हुए साफ पानी में इनके पनपने का खतरा ज्यादा होता है।
क्या है बचाव
डेंगू से पीड़ित मरीज को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। बुखार या सिरदर्द के लिए कोई पेन किलर नहीं लेना चाहिए। घर के अंदर कहीं भी पानी का जमाव न होनें दे। कूलर का पानी एक समय पर बदलने के बाद उसे सुखा लें। घर के आसपास किसी तरह की गंदगी न जमा होनें दे। ऐसे कपड़े पहने, जिससे शरीर पूरी तरह से ढका रहे। सोते समय घर की खिडक़ी और दरवाजे बंद कर दें। सोते समय मच्छरदानी की इस्तेमाल जरूर करें।
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डेंगू के अलावा मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार शहर व देहात क्षेत्रों में लोगों को मच्छरों से जागरूक करते हुए एंटी लार्वा व दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। जिले की सभी सीएचसी में 5-5 मच्छरदानियां लगवाई गई हैं। मच्छरों के लारवा पर नियंत्रण पाने के लिए रोज ही इसके प्रति जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
-डा. आभा आशुतोष, सीएमओ गोंडा
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