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थेली पर जान, फिर भी नहीं मिलता मन मुताबिक दाम

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हथेली पर जान, फिर भी नहीं मिलता मन मुताबिक दाम
मनरेगा मजूदरों से बदतर हुई संविदा बिजलीकर्मियों के हालात
पांच साल में आधा दर्जन संविदा बिजलीकर्मी गंवा चुके हैं जान
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। कहते हैं मानवीय संवेदनाएं ही आदमी को औरों से महान बनाती हैं। लेकिन जिले में ही नहीं वरन पूरे सूबे में जान हथेली पर लेकर काम करने वाले संविदा बिजलीकर्मियों के लिए पावर कारपोरेशन में किसी तरह की मानवीय संवेदना नहीं दिखाई देती। यही कारण है कि जोखिम भरा काम करने वाले यह संविदा बिजलीकर्मी दिन के महज चंद रुपयों के लिए अपनी जान तक हथेली पर लगा देते हैं। लेकिन जो मानदेय इन्हें मिलता है, वह मनरेगा मजदूरों से भी कम होता है। इतना ही नहीं काम करते समय जान से हाथ धोने पर भी इन्हें सिर्फ डेढ़ लाख रुपये की सहायता देकर ही चलता कर दिया जाता है। फिर चाहे संविदा बिजलीकर्मी की मौत के बाद उसका पूरा परिवार सड़क पर ही क्यों न आ जाए।
बीते पांच साल के भीतर जिले में लाइन पर काम करते हुए अबतक दर्जनभर के करीब संविदा बिजलीकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं। तीन साल पहले झंझरी बिजलीघर पर तैनात संविदा लाइनमैन श्रीकांत मिश्र को ऐसी ही एक लाइन दुर्घटना में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। जबकि श्रीकांत से पहले रामलौटन मिश्र, लालबहादुर सहित तीन अन्य लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जिले में जितनी भी मौतें अबतक संविदा बिजलीकर्मियों की हुई हैं, उसके पीछे इनकी सेफ्टी एक कारण निकलकर सामने आई है। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संविदाकार ठेकेदार की होती है।
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ठेकेदार को सीढ़ी पर चढक़र काम करने वाले बिजलीकर्मियों के लिए बिजलीघर वार सेफ्टी बेल्ट से लेकर रस्सा, कुप्पी, रबर के ग्लब्स सहित अन्य इंतजाम मुहैया कराने होते हैं। ताकि फाल्ट ठीक करने के लिए सीढ़ी पर चढ़े बिजलीकर्मी को किसी भी सूरत में करंट न लगे। लेकिन इसके बाद भी फाल्ट ठीक करने वाले संविदा बिजलीकर्मियों की करंट लगने से जान चली जाती है। सूत्रों की मानें तो जिले में किसी भी बिजलीघर पर सेफ्टी उपकरणों की कोई उपलब्धता नहीं है। इसलिए सीढ़ी पर चढक़र फाल्ट ठीक करने के लिए बिजलीकर्मियों को खुद के उपकरणों पर भी निर्भर रहना पड़ता है।
यही नहीं 24 घंटे जान हथेली पर लेकर काम करने वाले इन संविदा बिजलीकर्मियों को महीने के मानदेय के तौर पर कुशल है तो 73 सौ रुपये और अकुशल है तो 6 हजार रुपये ही दिए जाते हैं। जो कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों से भी कम है। ईपीएफ व जीपीएफ के तौर पर जो पैसा अबतक जिले में इन संविदा बिजलीकर्मियों का जमा हुआ है, उसका भी कोई पता नहीं है। ऐसे में काम करते समय अपनी जान गंवाने वाले संविदा बिजलीकर्मियों को इसका पैसा कभी मिलेगा भी या नहीं, पता नहीं।
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इनसेट
पावर कॉरपोरेशन की ओर से जो मानदेय संविदा बिजलीकर्मियों को ठेकेदार के मार्फत देय होता है, वह सीधे ऊपर से तय होता है। रही बात लाइन पर काम करने वाले बिजलीकर्मियों की सुरक्षा की तो इसकी भी सारी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। क्योंकि पावर कारपोरेशन जो काम संविदा बिजलीकर्मियों से लेता है, वह कांट्रैक्ट बेसिस है।
अशोक यादव, एक्सईएन विद्युत
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