प्रधान व सचिव ने बिना काम कराए हड़पे पांच लाख रुपये
- कागजों पर काम दिखाकर कराया भुगतान
- डीएम के निर्देश पर हुई जांच में खुलासा
मनकापुर (गोंडा)। मनकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कैमी में वित्तीय वर्ष 2013-14 में ग्राम प्रधान ने पंचायत सचिव के साथ मिलकर बिना काम कराए ही पांच लाख रुपये हड़प लिए। डीएम के निर्देश पर कराई गई जांच में इस घपले का खुलासा हुआ है। जांच टीम ने ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से गबन की गई धनराशि वसूलने की संस्तुति की है।
मनकापुर विकासखंड के कहोबा गांव निवासी रमेश कुमार सिंह ने ग्राम पंचायत कैमी में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों में घपले का आरोप लगाकर डीएम को शिकायती पत्र सौंपा था। इस पर तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने जिला समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह व डीआरडीए के सहायक अभियंता आरएन पांडेय की दो सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट के मुताबिक कहोबा गांव में साधु सिंह के घर के पास से नाली निर्माण में 5345 रुपये अतिरिक्त व्यय किया गया है। कहोबा मोतीगंज मार्ग से भुतहिया तक खड़ंजा के दोनों तरफ मिट्टी पटाई कार्य दिखाकर 14 मार्च 2014 को 40 हजार रुपये व्यय किए गए। जांच में मौके पर कोई कार्य नहीं कराने की पुष्टि हुई है। जगप्रसाद के घर से जयराम के घर तक खड़ंजा कार्य पर 11 हजार अतिरिक्त व्यय किया जाना पाया गया। इसी तरह रामदेव के दरवाजे पर खड़ंजा के नाम पर 3360 रुपये व भुतहिया में मिट्टी कार्य के नाम पर 91,458 रुपये अधिक खर्च किए गए। कहोबा गांव के पश्चिम तालाब खोदाई व जीर्णोद्धार के नाम पर दो लाख 16 हजार 510 रुपये बिना काम के ही भुगतान किया गया। इसी गांव में पौधरोपण के नाम एक लाख अतिरिक्त धनराशि खर्च कर दी गई। जांच टीम ने कुल आठ कामों में चार लाख 72 हजार रुपये के गबन की पुष्टि की है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव को दोषी मानते हुए उनसे इस धनराशि की वसूली की संस्तुति की है।
मनकापुर के कैमी गांव की तत्कालीन ग्राम प्रधान गीता यादव ने इस जांच को राजनीति से प्रेरित बताया है। गीता का कहना है कि पंचायत चुनाव की रंजिश को लेकर विपक्षी उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कोई घपला नहीं किया है। वहीं, इस मामले में दोषी ठहराई गईं पंचायत सचिव प्रेमा सिंह की मौत हो चुकी है।