गोंडा। जिला कारागार में निरुद्घ सजायाफ्ता 200 बंदियों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इसके लिए कौशल विकास मिशन की ओर से कारागार के सजायाफ्ता ऐसे 200 बंदी जिनकी रिहाई में सिर्फ एक साल का समय है। उन्हें विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले बंदियों को 7000 रुपये वजीफा देने के साथ ही उन्हें रोजगार भी दिया जाएगा।
अपर महानिरीक्षक प्रशिक्षण कारागार एवं सुधार सेवाएं वीके जैन ने जिला कारागार के ऐसे बंदियों को प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाने का निर्देश दिए हैं। जिला कारागार में सजायाफ्ता 200 बंदियों को कौशल विकास मिशन की ओर से विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। रोज चार घंटे व तीन माह तक प्रशिक्षण लेने के बाद बंदियों को प्रशिक्षण संबंधी परीक्षा कराई जाएगी।
परीक्षा में पास होने पर उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान 6000 से 7000 हजार रुपये वजीफा भी दिया जाएगा। इसके बाद जब वह जेल से रिहा होकर बाहर आएंगे तो उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नौकरी दिलाई जाएगा। इनमें से जिन बंदियों को खुद का व्यापार या उद्यम लगाना हो तो उन्हें बैंकों से ऋण दिलाया जाएगा।
जेल अधीक्षक शशिकांत सिंह ने बताया कि कारागार में निरुद्घ सजायाफ्ता 200 बंदियों को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास मिशन की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें सजायाफ्ता उन बंदियों को शामिल किया गया है, जिनकी रिहाई के एक साल व छह माह शेष हैं। ऐसे बंदियों को 7000 हजार रुपये प्रशिक्षण के दौरान कौशल विकास मिशन की ओर से वजीफा दिया जाएगा और रोजगार के लिए ऋण भी दिया जाएगा।