जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों व सहायिकाओं को उधार के झिकझिक की समस्या से निजात मिल जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां व सहायिकाएं अपने निजी कमरों में केंद्र का संचालन कर सकेंगी। जिले के सभी नौ ब्लॉकों में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण 16 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। रसोईघर, टॉयलेट व बिजली से नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र रोशन होंगे। आरईएस को 101 तथा ग्राम पंचायत को 99 केंद्रों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बता दें कि जिले में 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। जिले के 800 आंगनबाड़ी केंद्र पहले से ही निजी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। जिले में 1082 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन प्राइमरी स्कूल व पंचायत भवन में उधार के बिल्डिंग में किया जा रहा है।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों के निजी भवन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा। जिला कार्यक्रम अधिकारी के प्रस्ताव पर परियोजना निदेशक ने 200 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को हरी झंडी दे दी। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 200 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य 16 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से पूरा कराया जाएगा।
आरईएस को 101 तथा ग्राम पंचायतों को 99 केंद्रों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक केंद्र का निर्माण आठ लाख छह हजार रुपये की लागत से कराया जाएगा। पांच लाख रुपये मनरेगा योजना से, दो लाख रुपये बाल विकास परियोजना से तथा एक लाख छह हजार रुपये ग्राम पंचायत के चतुर्थ राज वित्त आयोग के मद से खर्च किया जाएगा। कार्यदाई संस्थाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों पर शानदार रसोईघर व टॉयलेट का निर्माण कराने का निर्देश दिया गया है। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को बिजली से भी रोशन किया जाएगा।
इन 200 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के बाद जिले के 882 केंद्र अभी भी उधार के भवन में चलाए जाएंगे। विभागीय लोगों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का निजी भवन में संचालन न होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निजी भवन होने से संसाधनों को रखने में काफी सहूलियत मिलेगी। विभागीय लोगों ने जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन निजी भवन में कराने की मांग की है।