मनरेगा के तहत गांव के मजदूरों को न तो रोजगार मिल पा रहा है और न ही कराए गए काम की मजदूरी। काम करने के बाद भी जिले के 20 हजार मजदूर अपनी मजदूरी पाने के लिए भटक रहे हैं। इन मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए 7.08 करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन पिछले डेढ़ माह से मनरेगा मद में पैसा न होने के कारण इनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। इसके अलावा मनरेगा में सामग्री का भी 2.85 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। मजदूरी पाने के लिए श्रमिक इधर-उधर भटक रहे हैं।
गांवों के मजदूरों को गांव में ही सौ दिन का रोजगार मिल सके, इसके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना संचालित है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के अप्रैल में जिले में महज 24403 मानव दिवसों का सृजन कर मजदूरों को रोजगार दिलाया गया था। इसके बाद डीएम आशुतोष निरंजन ने एक मई को मजदूर दिवस के मौके पर जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में एक साथ मनरेगा के कामों की शुरुआत कराई थी।
डीएम के अथक प्रयास के बाद मई में 55359 मानव दिवसों का सृजन किया जा सका। जून में 53961 मानव दिवसों का सृजन कर मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, लेकिन जुलाई में सृजित मानव दिवसों की संख्या आधे से भी कम रह गई और इस माह में केवल 23255 मानव दिवसों का काम हो सका।
इन चार माह के कामों के बदले कुछ मजदूरों को उनकी मजदूरी मिल गई, लेकिन जिन गांवों के प्रधान सुस्त रह गए, उन गांवों के मजदूरों का भुगतान फंस गया। वर्तमान समय में करीब 20 हजार मनरेगा मजदूरों की 5.76 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है।
इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2015-16 में काम करने वाले मजदूरों की 1.32 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान अटका हुआ है। मनरेगा मद में राशि न होने से प्रधानों ने भी बिना भुगतान के काम कराने से मना कर दिया है।
इनसेट
इन ब्लॉकों में है सबसे ज्यादा बकाएदारी
ब्लॉक धनराशि
कटरा 1.74 करोड़
रुपईडीह 64 लाख
हलधरमऊ 49 लाख
मनकापुर 46 लाख