स्कूल से बैरंग लौटे एक लाख नौनिहाल, दफ्तरों नहीं हुआ काम
गोंडा। पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग को लेकर बुधवार को लेखपालों, कलेक्ट्रेट कर्मियों सहित अन्य राज्य कर्मचारी हड़ताल पर रहे। कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक प्रभाव कुछ स्कूलों पर पड़ा जहां के शिक्षकों ने भी आंदोलन के समर्थन में कार्य बहिष्कार किया।
ऐसे में सुबह एक लाख से अधिक नौनिहालों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। साथ ही सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज बाधित रहा जिससे फरियादी परेशान नजर आए।
कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी पुुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले चलने वाले तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार के पहले दिन बुधवार को शिक्षक स्कूल तो गए लेकिन न तो चाक उठाया और न ही शिक्षण कार्य किया।
हालांकि शिक्षकों के कई संगठन हैं, लेकिन पेंशन की मांग परोक्ष-अपरोक्ष रुपए से सभी एकजुट हैं और कार्य बहिष्कार में भी साथ है। इसका असर भी स्कूलों में देखने को मिला। पुरानी पेंशन की मांग को लेकर तमाम शिक्षकों ने स्कूलों में शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया।
इससे जिले के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने गए एक लाख से अधिक बच्चे बिना पढ़ाई के बैरंग घर लौट आए। इसके अलावा सरकारी दफ्तरों के सामने हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी मांगें दोहराई।
विकास भवन परिसर में धरने का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता राजेंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने की। इंद्रजीत सिंह,परवेज अकरम, कामेश्वरनाथ, नजमी कमाल,उपेंद्र सिंह,मनोज मिश्र,नौशाद अहमद,वंशीलाल वर्मा,विजय कुमार, किरन सिंह, कहकशा, रामचंदर यादव आदि कर्मचारी नेताओं की मौजूदगी में शिक्षक नेता आनंद तिवारी ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करे अन्यथा अब आर पार लड़ाई करने का समय आ गया है।
इंद्र पाल तिवारी ने कहा कि यदि मांगे नहीं मानी गई तो संगठन कठोर निर्णय लेगा। धरने को विनय प्रकाश त्रिपाठी, पूनम, निहारिका, रोशनी, मुक्ता, देवमणि, सुगुप्ता, बबिता वर्मा, बृजनंदन मिश्र, लवकुश शुक्ल, सर्वदेव शुक्ल, कमल हसन, राकेश यादव, आशुतोष शुक्ल ने भी अपनी बात रखते हुए पुरानी पेंशन के लिए चलने वाले आंदोलन को जोरदार बनाने का आह्वान किया।
मीडिया प्रभारी वीरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन अफसर हसन एवं विजय कुमार ने किया। इसी तरह तहसीलों, विकास भवन समेत विभिन्न सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी तो रहे पर कार्य नही कर रहे थे।
ऐसा ही हाल ब्लाकों और तहसीलों में भी रहा। शहर से लेकर गावों तक पुरानी पेंशन बहाली के मांग की गूंज रही। सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को आजीवन मिलने वाली पेंशन 1 अप्रैल 2005 से बंद कर दी गई थी।
इसके बाद न्यू पेंशन स्कीम शुरु की गई थी। न्यू पेंशन स्कीम में कर्मचारियों का अंशदान भी जमा होता है। यह स्कीम कर्मचारियों को पसंद नही आई जो अब आन्दोलन का रूप ले रहा है। पदाधिकारियों ने कहाकि जिले के 35 विभागों के करीब दस हजार कर्मियों का आन्दोलन में समर्थन मिला है। सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करनी ही होगी।