गोंडा। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। बीते एक वर्ष में कराई गई जांच में करीब हर दूसरा नमूना फेल मिला है, जिससे आम लोगों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच चलाए गए अभियान में कुल 449 नमूने लिए गए थे। इनमें से 334 की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। 178 नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। विभाग ने इस मामले में 145 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है, जबकि न्यायालय ने मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने वालों पर 28.15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जांच में सामने आया कि दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, घी और खोवा में सबसे अधिक मिलावट पाई गई। पनीर बनाने में मिल्क पाउडर और रिफाइंड का उपयोग किया जा रहा है, जबकि मिठाइयों में मानक से अधिक और कई बार घटिया रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। अभिहीत अधिकारी अजीत मिश्र ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की है कि खाद्य सामग्री खरीदते समय गुणवत्ता और स्रोत पर विशेष ध्यान दें।