गोंडा। बाढ़ से बचाव के लिए करनैलगंज क्षेत्र में एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के नए रिंग बांध का निर्माण शुरू हो गया। इस बार रिंग बांध का दायरा काफी लंबा कर दिया गया है। सिंचाई व बाढ़ कार्य खंड का दावा है कि रिंग बांध को इस तरह से बनाया जा रहा है कि जिससे बाढ़ के कहर से गांवों को बचाया जा सके। बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। पहले बांध कई स्थानों पर घुमावदार था इससे घाघरा के दबाव से कट जाता था। अब रिंग बांध से बांध को सीधा भी करने का प्रयास किया जा रहा है। उधर नए रिंग बांध के बनाए जाने से उसके दायरे में नकहरा गांव आ रहा है और गांव की आबादी बांध के भीतर आ रही है। इससे गांव के लोग सहमे हुए हैं, उनका कहना है कि बेवजह बांध का दायरा बढ़ा दिया गया है। इससे पूरा गांव, सैकड़ों बीघा जमीन दांव पर है।
एल्गिन-चरसड़ी बांध एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब तक रुका रिंग बांध का काम फिर शुरू हो चुका है। विगत वर्ष इस रिंग बांध को बनाने के लिए ग्रामीणों के साथ बैठक कर प्रशासन व सिंचाई विभाग ने तरह तरह के दांव पेंच आजमाये थे। ग्रामीण किसी भी दशा में अपनी जमीन देने को तैयार नहीं थे। वहीं कुछ ग्रामीणों ने रिंग बांध के लिए जमीन की रजिस्ट्री कर दी थी। रिंग बांध पर काम शुरू होते ही एक बार यह मुददा फिर से गरमा चुका है। गांव वालों ने बताया कि हम बांध बनाने का विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन करीब 500 घर वाला गांव नकहरा पूरा बांध और नदी की जद में आ जायेगा। जिससे बाढ़ आते ही गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा।
अब प्रशासन व सिंचाई विभाग जहां रिंग बांध बनाने पर आमादा है तो वहीं ग्रामीण अपने गांव नकहरा के अस्तित्व को बचाने के लिये कमर कस लिये हैं। ग्रामीणों से रिंग बांध बनाने से होने वाली परेशानी के तहत इससे पहले भी कई बार गांव वाले अपनी जमीन बांध बनाने के नाम पर दे चुके हैं। हर बार एक नया रिंग बांध बना दिया जाता है। रिंग बांध बनाने में जिनकी जमीन आती है उन्हें तो मुआवजा मिल भी जाता है पर नदी और बांध की जद में आने वाली और जमीन बाढ़ आते ही कट कर घाघरा में समा जाती है। अब तक बहुत सारी जमीन बांध के चलते घाघरा में समा चुकी है। अब जो कुछ थोड़ा बहुत बचा है वह फिर बांध के नाम पर प्रशासन मांग रहा है।
200 से अधिक मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास भी जद में
कई सालों से बाढ़ की मार झेल रहे यहां के ग्रामीणों ने किसी तरह अपने आशियाने तैयार किये थे। जिनमें करीब 200 से अधिक मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आवास भी शामिल बताये जाते हैं। यही नहीं करीब 151 लोगों को हाल ही में शौचालय भी दे दिया गया है जो बनकर तैयार है। ऐसे में रिंग बांध बनते ही घाघरा का पानी सीधे इसी रिंग बांध से आकर टकरायेगा। जिससे नकहरा गांव के सम्भरपुरवा, खालेपुरवा, पोहिलपुरवा, कंहारनपुरवा सहित तीरथरामपुरवा, देवकिशुन पुरवा व नकहरा गांव पूरा जलमग्न हो जायेगा। इससे करीब 5000 की आबादी सहित 500 मकान प्रभावित होंगे। गांव वालों ने बताया कि सरकार प्रतिवर्ष बांध बनाने का काम तो करती है। पर उससे उजडने वाले गांवों को पुन: बसाने की कोई योजना नहीं बना रही। जिससे अब ग्रामीण खौफजदा है।
बालू से बना रहे हैं, बांध कैसे होगा मजबूत
बाढ़ से बचाव के लिए बनाए जा रहे रिंग बांध के निर्माण में बालू का इस्तेमाल हो रहा है। घाघरा के तेज धार को बालू कैसे बर्दाश्त कर पाएगा, यह एक सवाल है। यहां बनाये जाने वाला रिंग बांध पूरी तरीके से अव्यवस्था का शिकार है। यहां न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी ही रहता है और न ही ठेकेदार। बांध बनाने का काम पूरी तरह से लेबरों और ट्रैक्टर चालकों के जिम्मे है। बांध में पूरी तरह से बालू का प्रयोग किया जा रहा है। बस अगल बगल ही ट्रैक्टर ट्रालियों से लाकर कुछ मिट्टी डाली जा रही है। बांध की मजबूती के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं है। माना जा रहा है कि बांध के निर्माण में हर साल खेल होता है और फिर छानबीन से आगे प्रशासन के कदम नही बढ़ पाते हैं। माना जा रहा है कि इस बार भी बांध बनाने की सिर्फ औपचारिका निभाई जा रही है।
बाढ़ से पहले काम पूरा करने के निर्देश
बाढ़ आने से पहले रिंग बांध का निर्माण किया जाना है और कार्य जारी है। निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्य की निगरानी की जा रही है। - बीएन शुक्ल, एक्सईन बाढ़ कार्य खंड