बजाज चीनी मिल ने की थी खराब गन्ना बीज की सप्लाई
गोंडा। जिले की बजाज कुन्दुरखी चीनी मिल ने दो साल पहले किसानों को रिजेक्ट वैरायटी के गन्ना बीज की सप्लाई की थी। किसानों को अर्ली वैरायटी बताकर रिजेेक्ट वैरायटी देेने के मामले की हाईकोर्ट के हस्तक्षेप करने पर राजकीय गन्ना शोध संस्थान परिषद के गन्ना वैज्ञानिकों की जांच में रिजेक्ट वैरायटी का गन्ना होने का खुलासा हुआ है।
गन्ना विभाग किसानों को हुए घाटे की क्षतिपूर्ति तो नही करा पाया लेकिन रिजेक्ट गन्ने की वैरायटी के गन्ने की मिल से खरीद कराये जाने का दावा किया है।
गन्ना पेराई वर्ष 2015-16 बजाज चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम बौंरिहा के गन्ना किसान भगवान दत्त ने 73 क्विंटल, अजय प्रताप सिंह ने 45.80 क्विंटल बीज लिया था। किसानों का आरोप था कि बजाज चीनी मिल की ओर से किसानों को कोशा-0239 प्रजाति का गन्ना अर्ली वैरायटी प्रजाति का कह कर दिया गया था।
क्षेत्र के वीर प्रताप सिंह, राहुल सिंह, राजेश व आनन्द आदि कई और किसानों ने भी यही बीज लेकर बोवाई की। किसानों का जब पेराई सत्र 2016-17 में इसी वैरायटी के बोये गये गन्ने का सर्वे किया गया तो उसे सामान्य प्रजाति में दर्ज किया गया।
इसी को जब पेराई सत्र 2017-18 में चीनी मिल ने सर्वे किया तो उसे रिजेक्ट में दर्ज किया। इस पर किसानों ने अधिकारियों के यहां शिकायत दर्ज कराकर हंगामा काटा। लेकिन अधिकारियों ने इस पर यह कहकर कोई ध्यान नही दिया कि चीनी मिल व किसानों ने सीधे बीज की खरीद फरोख्त की है विभाग के जरिये गन्ना नही खरीदा।
इसके बाद किसानों ने चीनी मिल की ओर से धोखाधड़ी किये जाने का आरोप लगाकर उच्च न्यायालय की शरण ली वहां सुनवाई के लिए याचिका दाखिल की। उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने इस मामले में प्रदेश के राजकीय गन्ना शोध संस्थान परिषद शाहजहांपुर के विशेषज्ञों से गन्ना के प्रजाति की जांच कराने व मामले के निस्तारण कराने का विभागीय अधिकारियों को आदेश दिया।
गन्ना शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने किसानों के खेत से गन्ना ले जाकर उसकी जांच की तो पाया कि चीनी मिल की ओर से बीज में जिसे अर्ली कहकर दिया गया था वह रिजेक्ट वैरायटी का है। वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में उक्त गन्ने को रिजेक्ट वैरायटी करार दिया है। इस मामले में गन्ना किसान राहुल सिंह का कहना है कि किसानों को अर्ली कहकर जो बीज दिया गया वह रिजेक्ट निकला इससे किसानों को जो घाटा हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति नही मिली।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से चीनी मिल ने रिजेक्ट वैरायटी के गन्ने की खरीद तो कर ली लेकिन कोई क्षतिपूर्ति नही दी। वहीं इस मामले में जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर गन्ना राजकीय गन्ना शोध संस्थान परिषद शाहजहांपुर से जांच में गन्ने को रिजेक्ट पाया गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद बौंरिहा गांव के जिन किसानों को अर्ली वैरायटी के नाम पर रिजेक्ट वैरायटी का बीज मिला था उस गन्ने की मिल से अब रिजेक्ट वैरायटी के ही रूप में खरीद करायी जा रही है।
किसानों को लगे चपत की नही हुई भरपाई
गोंडा। बजाज चीनी मिल क्षेत्र के ग्राम बौंरिहा के किसानों को बीज खरीद में धोखाधड़ी से लगे चपत की भरपायी नही मिली। जिन किसानों को अर्ली वैरायटी का बीज बताकर किसानों को दिया गया था वह रिजेक्ट वैरायटी का था।
अर्ली वैरायटी के गन्ने की कीमत व रिजेक्ट वैरायटी की कीमत में 10 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का अन्तर है। गांव के गन्ना किसानों की माने तो किसानों ने करीब 200 क्विंटल गन्ने का बीज लिया था।
किसानों का यही बीज यदि वास्तव में अर्ली वैरायटी का होता तो किसानों का गन्ना मंहगा बिकता लेकिन रिजेक्ट होने से यह गन्ना 10 से 15 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता बिक रहा है। इससे किसानों का लागत व श्रम के मुकाबले घाटा हुआ है। जिसकी किसानों को भरपाई नही मिली।
गन्ना विभाग के सहयोग से बीज लें किसान
गन्ना किसान नयी वैरायटी के गन्ने के बीज को गन्ना विभाग के सहयोग से ही प्राप्त करें। विभाग की ओर से किसानों को स्वीकृत प्रजाति का गन्ना बीज मुहैया कराया जा रहा है। किसान हर हाल में अर्ली वैरायटी के ही गन्ने की बोवाई करें जिससे उन्हें अधिक उत्पादन मिल सके। मनमानी तरीके से बीज की खरीद फरोख्त करने पर विवाद के मामले में चीनी मिलें खुद जिम्मेदार होंगी।
- अमर सिंह, उप गन्ना आयुक्त